छत्तीसगढ़ में अब भी सक्रिय शिकारी: 7 दिन तक मौत से जूझता रहा तेंदुआ, उदंती–सीतानदी में सुरक्षा तंत्र फेल?

छत्तीसगढ़ में अब भी सक्रिय शिकारी: 7 दिन तक मौत से जूझता रहा तेंदुआ, उदंती–सीतानदी में सुरक्षा तंत्र फेल?

रायपुर: छत्तीसगढ़ में वन्य प्राणियों पर मंडराता शिकारी खतरा अब भी पूरी तरह टला नहीं है। जहां एक ओर अवैध शिकारी जंगलों में सक्रिय हैं, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारी ऐसे भी हैं जो वन्य जीवों की रक्षा के लिए अपनी जान तक जोखिम में डालने से पीछे नहीं हटते।

ऐसा ही एक सराहनीय मामला उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व से सामने आया है, जहां शिकारियों द्वारा लगाए गए फंदे में एक तेंदुआ बुरी तरह फंस गया। तेंदुए के गले में दो क्लच वायर से बना फंदा पिछले करीब 7 दिनों से फंसा हुआ था, जिससे उसकी जान को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था।WhatsApp-Image-2025-12-26-at-10.32.51-AM

ड्रोन फेल, लेकिन हौसला कायम
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जब ड्रोन तकनीक असफल हो गई, तब एसडीओ गोपाल कश्यप ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए रस्सी के जाल की मदद से खुद आगे बढ़कर तेंदुए को काबू में किया। यह पल बेहद जोखिम भरा था, लेकिन उनकी सूझबूझ और बहादुरी से बड़ा हादसा टल गया।

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मौके पर ही इलाज, जंगल सफारी की डॉक्टर टीम ने बचाई जान
रेस्क्यू के तुरंत बाद जंगल सफारी रायपुर के डॉक्टर जय किशोर जडिया के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने मौके पर ही घायल तेंदुए का उपचार किया। समय पर इलाज मिलने से तेंदुए की जान बचाई जा सकी।WhatsApp-Image-2025-12-26-at-10.32.50-AM-471x1024

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आबादी पर हमले का था खतरा
फंदे से घायल होने के कारण तेंदुआ बेहद आक्रामक स्थिति में था, जिससे आसपास की आबादी पर हमले का खतरा भी बना हुआ था। वन विभाग की तत्परता से यह संभावित खतरा भी टल गया।

उपनिदेशक वरुण जैन का बयान
इस मामले पर उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि अवैध शिकारियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। शिकारियों की सूचना देने वालों के लिए इनाम योजना भी लागू है।

सवाल भी ज़रूरी
यह घटना जहां वन विभाग के कुछ अधिकारियों की निष्ठा और साहस को उजागर करती है, वहीं यह सवाल भी खड़ा करती है कि अवैध शिकार पर पूरी तरह लगाम क्यों नहीं लग पा रही है? वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए ऐसे जांबाज़ अधिकारियों की जरूरत है, लेकिन साथ ही सिस्टम की जवाबदेही और सख्त निगरानी भी उतनी ही ज़रूरी है।

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