बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की जान से खिलवाड़: भट्टी जैसे तपते प्लेटफॉर्म पर बिक रहा बासी खाना, पैकेट से तारीख और रेट गायब

बिलासपुर। रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और सेहत को लेकर चाहे जितने बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन बिलासपुर स्टेशन पर हकीकत बेहद डरावनी है। यहां के प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ हो रहा है। कैटरिंग स्टालों पर बिकने वाले खाने के पैकेटों पर न तो उसे बनाने का समय लिखा है और न ही कोई तारीख। हद तो तब है जब इन पर रेट लिस्ट और बेचने वाले स्टॉल का नाम तक गायब है। भयंकर गर्मी के बीच, बिना यह जाने कि खाना कब बना है, उसे खाना सीधा बीमारी को न्योता देना है।

दो घंटे में खराब हो जाता है खाना, पर धड़ल्ले से बिक रहा

प्लेटफॉर्म नंबर 4 और 5 की हालत सबसे ज्यादा खतरनाक है। दोपहर के समय यहां का तापमान खुले आसमान की तुलना में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहता है। भट्टी की तरह तपते इन प्लेटफॉर्म पर पका हुआ खाना मुश्किल से दो घंटे ही सही रह सकता है। लेकिन मुनाफे के लालच में यहां घंटों पुराना खाना बेचा जा रहा है।

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इन प्लेटफॉर्म से दोपहर के समय कई लंबी दूरी की ट्रेनें गुजरती हैं। सफर और भूख से परेशान यात्री मजबूरी में इन्हीं स्टालों से खाना खरीदते हैं। गर्मी में बासी खाना खाने से पेट खराब होना, उल्टी और दस्त जैसी शिकायतें तुरंत हो सकती हैं। ट्रेन के अंदर इलाज मिलना वैसे ही मुश्किल होता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

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बीमार पड़ने पर शिकायत किससे करें?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर मुसाफिर को फूड पॉइजनिंग हो जाए, तो वह शिकायत किससे करेगा? कई पैकेटों पर तो उस स्टॉल का नाम और नंबर तक नहीं है जिसने उसे बेचा है। यह कोई छोटी-मोटी गलती नहीं, बल्कि एक सोची-समझी चालाकी है ताकि कोई भी वेंडर पकड़ में न आ सके। बिना बिल और बिना सही जानकारी के खाना बेचना सीधे तौर पर नियमों की धज्जियां उड़ाना है।

कमर्शियल विभाग गहरी नींद में, जांच के नाम पर सिर्फ दिखावा

रेलवे के कमर्शियल विभाग की जिम्मेदारी है कि वह इन स्टालों की लगातार जांच करे। लेकिन हकीकत यह है कि प्लेटफॉर्म पर जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। जब कभी-कभार जांच का नाटक शुरू होता है, तो स्टॉल वाले आनन-फानन में पैकेटों पर पर्चियां चिपकाने लगते हैं। जैसे ही अधिकारी वापस जाते हैं, फिर से वही पुराना गोरखधंधा शुरू हो जाता है। यात्रियों की सेहत से ज्यादा अहमियत वेंडरों की मनमानी को दी जा रही है।

अधिकारियों के रटे-रटाए जवाब

जब इस गंभीर मामले पर सीनियर डीसीएम अनुराग कुमार सिंह से बात की गई, तो उन्होंने वही पुराना रटा-रटाया जवाब दे दिया। उनका कहना है कि 'नियमों के मुताबिक पैकेटों पर रेट लिस्ट, क्वालिटी और क्वांटिटी सुनिश्चित की जाएगी। यात्रियों को ताजा खाना मिले और मांगने पर बिल दिया जाए, इस पर ध्यान दिया जाएगा।

 

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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