आरटीई का सिंडिकेट: गरीब बच्चों के हक पर डाका, मुनाफे के लिए निजी स्कूलों ने खेला आंकड़ों का खेल
बिलासपुर | शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून गरीब और वंचित तबके के बच्चों के लिए बनाया गया था, ताकि वे भी बड़े और प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में तालीम हासिल कर सकें। लेकिन बिलासपुर संभाग में शिक्षा माफियाओं ने इसे शासन से पैसा ऐंठने और अपनी तिजोरी भरने का जरिया बना लिया है। नियम के मुताबिक हर निजी स्कूल को एंट्री लेवल की 25% सीटें आरटीई के तहत आरक्षित करनी होती हैं, लेकिन यहां एक बड़ा 'आंकड़ों का खेल' सामने आया है। संभाग के 8 जिलों के 271 निजी स्कूलों में आरटीई एडमिशन में भारी गड़बड़ी पकड़ी गई है।
ऑनलाइन मॉनिटरिंग में खुलासा हुआ है कि स्कूलों ने नियमों को ताक पर रखकर दोहरे तरीके से सिस्टम को चूना लगाया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए 7 दिनों के भीतर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) का अल्टीमेटम दिया है।
मुनाफे और मनमानी का डबल गेम: ऐसे समझिए पूरा खेल
गड़बड़ी मुख्य रूप से दो स्तरों पर की गई है:
छुटभैये स्कूलों का 'फंडिंग' लालच:
150 से ज्यादा छोटे निजी स्कूलों ने अपनी कुल दर्ज छात्र संख्या बढ़ाकर दिखा दी। मकसद साफ था— आरटीई के तहत ज्यादा से ज्यादा एडमिशन दिखाकर शासन से प्रति छात्र मिलने वाली फीस प्रतिपूर्ति (Reimbursement) की मोटी रकम डकारना।
बड़े स्कूलों की सीट बचाओ साजिश:
वहीं, 100 से ज्यादा बड़े और नामी स्कूलों ने जानबूझकर अपनी कुल छात्र संख्या कम बताई। ताकि 25% के कोटे के तहत उन्हें कम गरीब बच्चों को एडमिशन देना पड़े और वे अपनी बाकी सीटें सामान्य कोटे के तहत भारी-भरकम फीस और डोनेशन पर बेच सकें। उदाहरण के लिए, जहां 25 सीटों वाले सेक्शन में 6 बच्चों को लेना था, वहां महज 1 या 2 बच्चों को ही लिया गया।
नियमों की उड़ी धज्जियां: हैरान करने वाले मामले
आंकड़ों की बाजीगरी ऐसी कि गणित भी फेल हो जाए:
सिरगिट्टी: एक निजी स्कूल में 70 सीटों पर भर्ती हुई। नियम से यहां आरटीई के 17 बच्चे होने थे, लेकिन शासन से पैसा लेने के चक्कर में 40 बच्चों को आरटीई में घुसा दिया गया।
चकरभाठा:यहां तो हद ही हो गई। स्कूल में कुल सीटें 20 हैं, लेकिन आरटीई के तहत 24 बच्चों को प्रवेश दे दिया गया।
बेलतरा:
एक स्कूल ने 44 बच्चों की भर्ती दिखाई और कमाल की बात ये है कि सभी 44 बच्चों को आरटीई के तहत दर्ज बता दिया गया।
गड़बड़ी में बिलासपुर संभाग में टॉप पर
घोटाले के इस पूरे नेक्सस में बिलासपुर जिला सबसे आगे है। जिले के 629 स्कूलों में आरटीई लागू है, जिनमें से अकेले 89 स्कूलों में अनियमितता पकड़ी गई है।
जिलेवार संदिग्ध स्कूलों की सूची

7 दिन में रिपोर्ट तलब, मान्यता रद्द होने की चेतावनी
घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप है। पूरे संभाग में जांच के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर दी गई हैं। जिला परियोजना अधिकारी (समग्र शिक्षा) के नेतृत्व में बनी इन टीमों में एक बीईओ (BEO) और एक प्राचार्य को भी शामिल किया गया है।
आरटीई के तहत स्कूलों में भर्ती को लेकर गड़बड़ी सामने आई है। सभी 271 संदिग्ध स्कूलों की सूची टीमों को सौंप दी गई है और उनका भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। इसके लिए टीम गठित कर दी गई है।
आर.पी. आदित्य, संयुक्त संचालक, बिलासपुर संभाग
