Chhattisgarh City Bus Crisis: मेंटेनेंस की अनदेखी से 155 बसें ठप, 86 की ऑनलाइन नीलामी; इलेक्ट्रिक बस योजना अधर में

Chhattisgarh City Bus Crisis: मेंटेनेंस की अनदेखी से 155 बसें ठप, 86 की ऑनलाइन नीलामी; इलेक्ट्रिक बस योजना अधर में

रायपुर। प्रदेश में शहरी परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई सिटी बस परियोजना प्रशासनिक उदासीनता और रखरखाव की कमी के कारण संकट में फंस गई है। राज्य के प्रमुख शहरों में संचालित सैकड़ों बसें तकनीकी खराबी और अनुबंध समाप्त होने के कारण संचालन से बाहर हो चुकी हैं। स्थिति यह है कि 155 बसें अनुपयोगी घोषित की जा चुकी हैं, जिनमें से 86 को ऑनलाइन नीलामी के जरिए कबाड़ में बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मेंटेनेंस के अभाव में ठप हुईं बसें
विधानसभा में भाजपा विधायक Rajesh Munat के प्रश्न के लिखित उत्तर में उप मुख्यमंत्री Arun Sao ने जुलाई 2025 की स्थिति स्पष्ट की। जवाब के अनुसार 130 बसें मरम्मत योग्य पाई गई थीं, जिनमें से 59 बसों की मरम्मत कर दोबारा संचालन में लाया गया है। इनमें रायपुर में 37, बिलासपुर में 13, राजनांदगांव में 5 और रायगढ़ में 4 बसें शामिल हैं। शेष 71 बसें सोसायटियों और बस ऑपरेटरों के साथ हुए अनुबंध की अवधि समाप्त होने के कारण मरम्मत के अभाव में खड़ी हैं।

155 बसें पूरी तरह अनुपयोगी, 86 की नीलामी प्रक्रिया शुरू
जुलाई 2025 तक 155 बसों को अनुपयोगी घोषित किया गया। इनमें से 86 बसों की ऑनलाइन नीलामी की जा रही है। परिवहन विभाग के अनुसार लंबे समय से रखरखाव न होने, स्पेयर पार्ट्स की कमी और प्रशासनिक समन्वय की कमजोरी के कारण यह स्थिति बनी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा है कि जिन शहरों में बसें बिना संचालन के ही कंडम हुई हैं, वहां के जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

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इलेक्ट्रिक बस योजना पर अनिश्चितता
राज्य सरकार ने रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा जैसे प्रमुख शहरों में इलेक्ट्रिक बसें शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक इस योजना की कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं हो सकी है। सड़कों पर ई-बसें कब दौड़ेंगी, इसे लेकर परिवहन विभाग की ओर से ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

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दुर्ग-भिलाई में करोड़ों की बसें हुईं कबाड़
दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में सिटी बस परियोजना की स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, लगभग 10 से 20 करोड़ रुपये लागत वाली कई बसें उपयोग से पहले ही अनुपयोगी हो गईं। सुपेला डिपो में खड़ी बसें परमिट और संचालन अनुमति के अभाव में लंबे समय तक निष्क्रिय रहीं। रिपोर्ट्स के अनुसार कई बसों से टायर और इंजन जैसे अहम पुर्जे तक गायब मिले। हाल ही में स्थानीय निकाय द्वारा इन बसों की नीलामी कम कीमत पर किए जाने की बात भी सामने आई है।

शहरी परिवहन व्यवस्था पर सवाल
प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना का यह हाल प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर रखरखाव और अनुबंध प्रबंधन सुनिश्चित किया जाता, तो करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति को बचाया जा सकता था। राज्य सरकार अब जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए नई कार्ययोजना तैयार करने की बात कह रही है।

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