रायपुर जिला अस्पताल में 20 साल बाद भी कंपोनेंट ब्लड बनाने की सुविधा नहीं, निजी सेंटरों की चांदी

रायपुर जिला अस्पताल में 20 साल बाद भी कंपोनेंट ब्लड बनाने की सुविधा नहीं, निजी सेंटरों की चांदी

रायपुर। राजधानी के 20 साल पुराने जिला अस्पताल में आज भी मरीजों को जरूरत के हिसाब से खून के घटक यानी कंपोनेंट ब्लड नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में केवल पूरा खून (होल ब्लड) चढ़ाने की व्यवस्था है, जबकि भर्ती होने वाले 70 फीसदी मरीजों को प्लेटलेट्स या प्लाज्मा की जरूरत होती है। सुविधा के अभाव में गरीब मरीजों को मजबूरी में निजी ब्लड बैंकों का रुख करना पड़ रहा है, जहां उन्हें भारी भरकम रकम चुकानी पड़ती है। अस्पताल प्रबंधन सालों से लाइसेंस और मशीनरी का रोना रो रहा है, लेकिन अब तक फाइलें दफ्तरों के चक्कर ही काट रही हैं।

क्या है पूरा मामला

जिला अस्पताल में हर महीने औसतन 30 से 40 मरीजों को खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। इनमें से ज्यादातर मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें एनीमिया, डेंगू या संक्रमण के कारण सिर्फ प्लेटलेट्स या लाल रक्त कोशिकाओं की जरूरत होती है। चूंकि अस्पताल के पास कंपोनेंट अलग करने वाली मशीन नहीं है, इसलिए डॉक्टर चाहकर भी मरीज को सही इलाज नहीं दे पाते। हालत यह है कि राजधानी का मुख्य सरकारी अस्पताल होने के बावजूद यहां की व्यवस्थाएं दशकों पुरानी ढर्रे पर चल रही हैं।

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मशीन और लाइसेंस के फेर में फंसी सुविधा

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अस्पताल सूत्रों का कहना है कि कंपोनेंट ब्लड यूनिट शुरू करने के लिए विशेष मशीनों और कड़े मानकों वाले लाइसेंस की जरूरत होती है। जिला अस्पताल प्रशासन का दावा है कि उन्होंने इसके लिए आवेदन किया है, लेकिन प्रक्रिया इतनी जटिल है कि सालों बीत जाने के बाद भी मंजूरी नहीं मिल पाई है। इस देरी का सीधा खामियाजा उन मरीजों को भुगतना पड़ रहा है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और सरकारी मदद की उम्मीद में यहाँ आते हैं।

 

समझिए क्यों जरूरी है कंपोनेंट ब्लड

 

आम तौर पर जब किसी का एक्सीडेंट होता है या बड़ा ऑपरेशन होता है, तब उसे 'होल ब्लड' यानी पूरा खून चढ़ाया जाता है। लेकिन कई बीमारियों में मरीज को पूरे खून की जगह उसके खास हिस्सों की जरूरत होती है:

  •   आरबीसी: खून की कमी या एनीमिया होने पर।
  •  प्लेटलेट्स: डेंगू या ब्लड कैंसर जैसी स्थिति में।
  •  प्लाज्मा: जलने या गंभीर संक्रमण के मामलों में।

 

जिला अस्पताल में यह सुविधा न होने से एक यूनिट खून का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता और मरीजों की जेब पर भी डाका पड़ता है।

जिम्मेदार बोले

ब्लड बैंक का लाइसेंस हमारे पास पहले से है। कंपोनेंट ब्लड की सुविधा शुरू करने के लिए आवेदन किया गया है। वर्तमान में यह पूरी प्रक्रिया पाइपलाइन में है।

डॉ. संतोष भण्डारी, अधीक्षक, जिला अस्पताल रायपुर

 

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