अपनों की ही बगावत से घिरीं मेयर पूजा विधानी, सत्ता के अहंकार में बोलीं- 'आपको मेयर निधि का हिसाब मांगने का अधिकार नहीं

अपनों की ही बगावत से घिरीं मेयर पूजा विधानी, सत्ता के अहंकार में बोलीं- 'आपको मेयर निधि का हिसाब मांगने का अधिकार नहीं

NJV डेस्क, बिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम की सामान्य सभा शहर के विकास पर चर्चा का मंच बनने के बजाय मेयर पूजा विधानी की चौतरफा फजीहत का गवाह बन गई। शहर को मूलभूत सुविधाएं देने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो चुकीं मेयर साहिबा अब सत्ता के अहंकार में इस कदर डूब चुकी हैं कि उन्हें जनप्रतिनिधियों के सवाल भी चुभने लगे हैं। सदन में हालत यह थी कि कांग्रेस तो दूर, खुद उनकी अपनी ही पार्टी (भाजपा) के पार्षदों ने मेयर के खिलाफ ऐसा मोर्चा खोला कि वे पूरे समय बगलें झांकती नजर आईं।

 

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सफाई, पेयजल और अतिक्रमण के मुद्दों पर घिरीं मेयर के पास किसी भी सवाल का ठोस जवाब नहीं था। उनकी प्रशासनिक पकड़ और नेतृत्व क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सदन के सभापति विनोद सोनी को भरे मंच से यह स्वीकार करना पड़ा कि "अधिकारी उनकी भी नहीं सुनते।" जब निगम में अफसरों पर ही बेलगाम हो चुके हैं, तो समझा जा सकता है कि मेयर शहर को किस गर्त में धकेल रही हैं।

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तानाशाही और पारदर्शिता का अभाव: आपको हिसाब मांगने का अधिकार नहीं

 

मेयर की कार्यप्रणाली में तानाशाही किस कदर हावी है, यह प्रश्नकाल के दौरान खुलकर सामने आ गया। जब कांग्रेस पार्षद इब्राहिम खान ने मेयर निधि के खर्च का हिसाब मांगा, तो बजाय पारदर्शिता दिखाने के मेयर पूजा विधानी ने बेहद अहंकार भरे लहजे में कह दिया कि "यह आपके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।" एक चुने हुए जनप्रतिनिधि को जनता के पैसे का हिसाब पूछने का अधिकार नहीं है, यह बयान मेयर की अलोकतांत्रिक सोच को दर्शाता है। आरोप यह भी लगे कि मेयर निधि का पैसा सिर्फ चहेते भाजपा वार्डों में खपाया जा रहा है। जब छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो मेयर हिसाब देने से क्यों कतरा रही हैं?

 

जनता पी रही गंदा पानी, मेयर का बेतुका तर्क- 'पानी मटमैला है, बदबूदार नहीं'

 

 

अमृत मिशन योजना बिलासपुर में भ्रष्टाचार और बदइंतजामी की भेंट चढ़ चुकी है। सड़कें खुदी पड़ी हैं, पाइपलाइनें टूट रही हैं और जनता के घरों में नालियों का गंदा पानी पहुंच रहा है। कांग्रेस पार्षद दिलीप पाटिल और भाजपा पार्षद आंचल दुबे ने जब लीकेज और गंदे पानी पर अपनी ही शहर सरकार को घेरा, तो मेयर का जवाब उनकी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा था। उन्होंने कहा, "पानी मटमैला है, बदबूदार नहीं।" क्या शहर की प्रथम नागरिक बिलासपुर की जनता को मटमैला पानी पीने के लिए मजबूर कर रही हैं? क्लोरीन न डालने के आरोपों पर भी मेयर के पास कोई जवाब नहीं था। इब्राहिम खान ने पेयजल सुधार के लिए दिए गए 10 लाख रुपयों के गायब होने का भी मुद्दा उठाया, जिसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।

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अपनों का तंज- बरसात से पहले नाव दे दीजिए

 

मेयर की सबसे ज्यादा किरकिरी उनकी अपनी ही पार्टी के पार्षदों ने की। वार्ड 52 में जलभराव की बदतर स्थिति पर भाजपा पार्षद जय वाधवानी ने निगम की कार्यप्रणाली पर गहरा तंज कसते हुए कहा कि "बरसात से पहले नाव की व्यवस्था कर दीजिए, ताकि लोग आ-जा सकें।" यह बयान बताने के लिए काफी है कि मेयर ने शहर के ड्रेनेज सिस्टम का क्या हाल कर दिया है।

 

तानाशाही के खिलाफ 'मास्क' प्रोटेस्ट

 

मेयर अपने ही पार्षदों की आवाज दबाने का काम कर रही हैं। भाजपा पार्षद रंगा नादम का सदन में मास्क पहनकर आना इसी तानाशाही के खिलाफ एक मौन विरोध था। दो दिन पहले ही मेयर के साथ उनकी बहस हुई थी। नादम का यह मास्क पहनना इस बात का प्रतीक बन गया कि मेयर के राज में सच बोलने वालों का मुंह बंद कर दिया जाता है।

 

 

अफसरों को खुली चुनौती इधर महिला पार्षद का अपमान

 

शहर में गंदगी और प्रदूषण का आलम यह है कि भाजपा पार्षद रमेश पटेल को अफसरों को खुली चुनौती देनी पड़ी। उन्होंने साफ कहा कि अफसर एसी कमरे छोड़कर आधे घंटे छपरभाठा में बिता लें, तो अगले दिन सीधे अपोलो अस्पताल में भर्ती नजर आएंगे।

मेयर के राज में निगम की महिला पार्षदों का भी सम्मान सुरक्षित नहीं है। जब पार्षद रीता शंकर कश्यप ने सफाई कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठाया, तो अपनी नाकामी छिपाने के लिए एमआईसी मेंबर श्याम साहू ने उन पर व्यक्तिगत और अमर्यादित टिप्पणी कर दी कि "वार्ड में आपके पति नजर आते हैं, आप नहीं।" इस पर कश्यप को याद दिलाना पड़ा कि वे महिला हैं, कमजोर नहीं।

 

गरीबों पर ही चलता है अतिक्रमण का डंडा

 

शहर में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर मेयर का दोहरा रवैया भी बेनकाब हुआ। जब कांग्रेस पार्षद शहजादी कुरैशी ने रसूखदारों के बड़े अवैध निर्माणों को छोड़कर सिर्फ गरीबों के ठेले-गुमटियों पर कार्रवाई करने का आरोप लगाया, तो मेयर खीझ गईं। गायत्री लक्ष्मीनाथ साहू ने भी अवैध प्लाटिंग में

निगम की मिलीभगत की पोल खोल दी।

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