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खेतौली ग्राम पंचायत में प्रशासन का बुलडोजर: बिना नोटिस गरीबों के आशियाने तोड़े गए, ग्रामीणों में आक्रोश
जनकपुर। भरतपुर विकासखंड अंतर्गत खेतौली ग्राम पंचायत में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के गरीब परिवारों के आवास तोड़े जा रहे हैं, जिससे दर्जनों परिवार बेघर होने की कगार पर पहुंच गए हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिस शासकीय भूमि पर गरीब परिवार वर्षों से निवास कर रहे थे, वहां अब एकलव्य आवासीय विद्यालय का निर्माण प्रस्तावित है। इसी निर्माण कार्य के नाम पर प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाया गया, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराज़गी देखी जा रही है।
सरकारी योजनाओं पर सवाल
एक ओर शासन द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से गरीबों को पक्के मकान देने की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर पहले से बने आशियानों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के तोड़ना कई सवाल खड़े करता है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके पास रहने के लिए अब कोई सुरक्षित स्थान नहीं बचा है।.png)
ग्रामीणों की चेतावनी: आंदोलन और चुनाव बहिष्कार
ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि उनके आवास तोड़े गए तो वे आंदोलन करने और चुनाव बहिष्कार जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों की मांग है कि स्कूल का निर्माण भी हो, लेकिन गरीबों के आवासों को न तोड़ा जाए या फिर पहले उन्हें वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए।
प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन
इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है और जनप्रतिनिधियों को भी स्थिति से अवगत कराया गया है। अब सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
क्या मिलेगा गरीबों को न्याय?
अब सवाल यह है कि क्या शासन गरीबों को बेघर करेगा? या फिर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें न्याय दिलाया जाएगा? आने वाले दिनों में प्रशासन का निर्णय यह तय करेगा कि विकास और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बन पाता है या नहीं।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
