कागजों पर बने मकान, फर्जी निकले 186 हितग्राही! 27 साल पुराने हाउसिंग लोन घोटाले में EOW की 15 हजार पन्नों की चार्जशीट

कागजों पर बने मकान, फर्जी निकले 186 हितग्राही! 27 साल पुराने हाउसिंग लोन घोटाले में EOW की 15 हजार पन्नों की चार्जशीट

रायपुर। करीब 27 साल पुराने 1.86 करोड़ रुपये के चर्चित हाउसिंग लोन घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने जांच को महत्वपूर्ण मुकाम तक पहुंचाते हुए शुक्रवार को स्पेशल कोर्ट में करीब 15 हजार पन्नों का विस्तृत चालान पेश कर दिया। चालान तीन आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया गया है, जिन पर सरकारी आवास योजना के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये के ऋण का गबन करने का आरोप है।

इन तीन आरोपियों के खिलाफ पेश हुआ चालान
ईओडब्ल्यू द्वारा जिन आरोपियों के खिलाफ अभियोग पत्र दाखिल किया गया है, उनमें आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी, तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू तथा सहकारी आवास संघ, भोपाल के तत्कालीन प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा शामिल हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन लोगों ने सुनियोजित तरीके से सरकारी आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और नियमों को दरकिनार कर ऋण स्वीकृत कराया, जिससे सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ।

186 फर्जी सदस्यों के नाम पर पास कराए गए थे लोन
जांच के अनुसार, आरोपियों ने 186 कथित सदस्यों के नाम पर फर्जी आवेदन, दस्तावेज और रिकॉर्ड तैयार कराए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर करीब 1.86 करोड़ रुपये का हाउसिंग लोन स्वीकृत कराया गया। आरोप है कि ऋण की पूरी प्रक्रिया कागजों पर पूरी दिखाई गई, जबकि वास्तविक लाभार्थियों का कोई अस्तित्व ही नहीं था। ईओडब्ल्यू का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य सरकारी वित्तीय संस्थानों को धोखा देकर ऋण राशि का गबन करना था।

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1.86 करोड़ का कर्ज बढ़कर 104 करोड़ रुपये हुआ
जांच में यह भी सामने आया कि स्वीकृत ऋण की वसूली कभी नहीं हो सकी। लंबे समय तक राशि बकाया रहने के कारण मूलधन पर लगातार ब्याज जुड़ता गया। 31 दिसंबर 2025 तक यह बकाया राशि मूलधन और ब्याज सहित करीब 104 करोड़ रुपये के डूबत ऋण (एनपीए) में बदल चुकी है, जिससे सरकारी वित्तीय संस्थाओं को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

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जांच में नहीं मिले कर्जदार, खाली मैदान निकले पते
मामला सामने आने के बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने इसकी विस्तृत जांच के आदेश दिए थे। जांच टीम जब उन पतों पर पहुंची, जहां मकान निर्मित होने और हितग्राहियों के रहने का दावा किया गया था, तो वहां न तो कोई मकान मिला और न ही कोई वास्तविक ऋणी। बताए गए कई पते खाली मैदान या अन्य स्थान निकले। इसके बाद कथित ऋणधारकों की पहचान और सत्यापन किया गया, जिसमें अधिकांश नाम और दस्तावेज फर्जी पाए गए। जांच एजेंसी के अनुसार, इससे यह स्पष्ट हुआ कि पूरी आवास योजना केवल कागजों पर तैयार की गई थी और सरकारी धन के गबन के लिए फर्जी लाभार्थियों का सहारा लिया गया।

अब कोर्ट में चलेगी सुनवाई
ईओडब्ल्यू द्वारा 15 हजार पन्नों का चालान पेश किए जाने के बाद अब मामले की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में आगे बढ़ेगी। अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर आरोप तय करने और मुकदमे की अगली प्रक्रिया पर निर्णय लेगी। करीब तीन दशक पुराने इस बहुचर्चित मामले में चालान दाखिल होना जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर अदालत की आगामी सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है।

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