लोककला की महानायिका को राज्य सरकार का सम्मान, डॉ. तीजन बाई के नाम से जाना जाएगा गनियारी का स्कूल

लोककला की महानायिका को राज्य सरकार का सम्मान, डॉ. तीजन बाई के नाम से जाना जाएगा गनियारी का स्कूल

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाने वाली पद्मविभूषण पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई को राज्य सरकार ने अनूठी श्रद्धांजलि देने का निर्णय लिया है। उनके सम्मान में उनके गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नाम अब "डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी" होगा। इस निर्णय की घोषणा स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने रविवार को गनियारी में आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान की।

डॉ. तीजन बाई का रविवार, 5 जुलाई को रायपुर एम्स में इलाज के दौरान निधन हो गया। पिछले कई दिनों से उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर फैलते ही प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई। लोककला के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान को याद करते हुए बड़ी संख्या में कलाकारों, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

"छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना का स्वर्णिम अध्याय"
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना, ओजस्वी प्रस्तुति और आजीवन समर्पण से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि उनका निधन केवल एक महान कलाकार की विदाई नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के एक स्वर्णिम अध्याय का अवसान है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों और उनके असंख्य प्रशंसकों को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना भी की।

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आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा यह सम्मान
शिक्षा मंत्री ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का पूरा जीवन लोकपरंपराओं, संस्कृति और कला के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए समर्पित रहा। सीमित संसाधनों और अनेक संघर्षों के बावजूद उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर पूरी दुनिया में पंडवानी गायन की अलग पहचान बनाई। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और साधना का ऐसा उदाहरण है, जिससे आने वाली पीढ़ियां निरंतर प्रेरणा लेती रहेंगी।

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इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने उनके गृहग्राम के शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नाम उनके नाम पर रखने का निर्णय लिया है। मंत्री ने कहा कि यह केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रदेश की महान लोककलाकार के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। इससे विद्यालय में अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को डॉ. तीजन बाई के जीवन, संघर्ष और सांस्कृतिक योगदान को जानने और उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा।

लोकसंस्कृति की अमिट पहचान थीं डॉ. तीजन बाई
डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी गायन की परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी विशिष्ट शैली से महाभारत की कथाओं को देश-विदेश के मंचों तक पहुंचाया। उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। उनकी कला ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन से लोककला जगत को ऐसी क्षति पहुंची है जिसकी भरपाई लंबे समय तक संभव नहीं मानी जा रही है।

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