कोरोना ने फिर बढ़ाई चिंता! आंध्र प्रदेश में 13 नए मामले, 3 मौतें; जानिए क्या फिर बढ़ रहा है संक्रमण का खतरा
नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस (COVID-19) के मामले एक बार फिर चर्चा में हैं। आंध्र प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान संक्रमण के 13 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि तीन संक्रमित मरीजों की मौत की सूचना सामने आई है। इसके साथ ही देश के कुछ अन्य राज्यों और शहरों में भी कोरोना संक्रमण के मामलों में हल्की बढ़ोतरी देखी जा रही है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल स्थिति महामारी जैसी नहीं है और घबराने की बजाय सतर्क रहने की जरूरत है।
क्या फिर बढ़ रहा है कोरोना का खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, समय-समय पर कोरोना वायरस के मामलों में उतार-चढ़ाव आना अब असामान्य नहीं है। उनका कहना है कि SARS-CoV-2 अब 'एंडेमिक' (स्थानिक) वायरस का स्वरूप ले चुका है, यानी यह पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और मौसम, लोगों की आवाजाही तथा नए वेरिएंट के कारण बीच-बीच में मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, वर्तमान में सामने आ रहे अधिकांश मामलों में गंभीर लक्षण नहीं देखे जा रहे हैं और अस्पताल में भर्ती होने की दर भी पहले की तुलना में काफी कम है।
मामलों में बढ़ोतरी की क्या हो सकती है वजह?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में बदलाव, अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय यात्रा, भीड़भाड़ वाले सामाजिक एवं धार्मिक आयोजन तथा वायरस के नए सब-वेरिएंट संक्रमण बढ़ने के संभावित कारण हो सकते हैं। इसके अलावा, सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसे लक्षण होने पर अधिक लोगों की जांच कराए जाने से भी नए संक्रमितों की पहचान हो रही है।
अधिकांश मरीजों में हल्के लक्षण
डॉक्टरों के अनुसार, मौजूदा संक्रमण में अधिकांश मरीजों में हल्के या मध्यम लक्षण ही दिखाई दे रहे हैं। इनमें बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, बदन दर्द, थकान और कमजोरी जैसी शिकायतें शामिल हैं। अधिकांश संक्रमित घर पर ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लेकर कुछ दिनों में स्वस्थ हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापक टीकाकरण और पहले हुए संक्रमण से विकसित प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) के कारण गंभीर बीमारी और मृत्यु का जोखिम पहले की तुलना में काफी कम हो चुका है।
किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ वर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। इनमें 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, मधुमेह, हृदय, फेफड़ों या किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज, कैंसर रोगी तथा कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले लोग शामिल हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनें, हाथों की नियमित सफाई करें, खांसी-जुकाम या बुखार जैसे लक्षण होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखें और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
क्या फिर लग सकता है लॉकडाउन?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल लॉकडाउन, यात्रा प्रतिबंध या व्यापक पाबंदियां लगाने जैसी कोई स्थिति नहीं है। भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक मजबूत है और कोविड से निपटने का अनुभव भी काफी बेहतर हो चुका है। इसलिए आम लोगों को अफवाहों से बचते हुए केवल आवश्यक सावधानियां अपनाने की जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में संक्रमण के मामलों में स्थानीय स्तर पर वृद्धि होती है तो स्वास्थ्य विभाग स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठा सकता है। फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन कोरोना को पूरी तरह खत्म मानकर लापरवाही बरतना भी उचित नहीं होगा।
