नकटी के बाद धमतरी के कोलियारी में बुलडोजर का डर: रोजगार देने के नाम पर क्या उजड़ेंगे पीएम आवास वाले गरीबों के घर?

नकटी के बाद धमतरी के कोलियारी में बुलडोजर का डर: रोजगार देने के नाम पर क्या उजड़ेंगे पीएम आवास वाले गरीबों के घर?

रायपुर के नकटी गांव में विस्थापन की कार्रवाई का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब धमतरी जिले का कोलियारी गांव नए डर के साये में है। यहां के दर्जनों परिवारों को अचानक अतिक्रमण हटाने और मकान खाली करने का नोटिस मिला है। यह पूरा मामला सोचने पर मजबूर करता है कि जिन घरों को खुद सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनवाया, जहां बरसों से लोग रह रहे हैं, वे घर अचानक अतिक्रमण कैसे हो गए?

विकास और रोजगार की आड़ में जमीन का खेल?

ग्रामीणों का आरोप है कि जिस 22 एकड़ जमीन पर वे लंबे समय से अपना जीवन बिता रहे हैं, उसे मधुरिमा गुरुकुल परियोजना के विस्तार के लिए देने की प्रक्रिया चल रही है। बताया जाता है कि यह संस्थान अंबुजा फाउंडेशन और SEDI के सहयोग से चलता है। हम जानते हैं कि अंबुजा सीमेंट अब अडानी समूह के नियंत्रण में आता है। ऐसे में गांव वालों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या एक बड़े कॉर्पोरेट समूह की परियोजना के लिए, कौशल विकास और रोजगार सृजन के नाम पर, गरीबों के आशियाने उजाड़ने की तैयारी की जा रही है? महानदी किनारे की इस प्राकृतिक सुंदरता वाली जमीन को ही क्यों चुना गया, जबकि वहां पहले से गरीब परिवार बसे हुए हैं?

दहशत में एक हजार की आबादी

गांव वालों का कहना है कि उन्हें मकान खाली करने की कोई जानकारी व्यक्तिगत रूप से नहीं दी गई। बस रातों-रात सार्वजनिक जगहों पर नोटिस चस्पा कर कार्रवाई की चेतावनी दे दी गई। इससे करीब 50-60 मकानों में रहने वाली लगभग एक हजार की आबादी दहशत में है। लोगों को डर है कि कहीं नकटी गांव जैसी कार्रवाई उनके साथ भी न दोहरा दी जाए। प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है कि प्रस्तावित भूमि आवंटन और इस नोटिस की असल स्थिति क्या है।

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कुछ सवाल जो जवाब मांगते हैं:
  •  यदि यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में शासकीय थी, तो वहां बरसों से सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं कैसे पहुंच गईं?
  •  सबसे बड़ा सवाल, यहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान कैसे बन गए?
  •  अगर लोग वैध रूप से वहां रह रहे हैं, तो उन्हें हटाने से पहले उनके पुनर्वास की क्या व्यवस्था की गई है?
  •   क्या प्रशिक्षण देने के लिए पहले से बसे लोगों को बेघर करना ही एकमात्र विकल्प है?
प्रशासन से लिखित गारंटी की मांग

नकटी की कार्रवाई के बाद कोलियारी के लोगों में भय स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर राजधानी के करीब बसे लोगों की आवाज नहीं सुनी गई, तो उनकी गुहार कौन सुनेगा। गांव वालों ने मांग की है कि प्रशासन इस पूरे मामले को सार्वजनिक करे, जमीन की वास्तविक स्थिति बताए और किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की लिखित गारंटी दे। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह मामला भी एक बड़े जनआंदोलन में बदल सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन लोगों की आशंकाओं को दूर करता है या फिर विकास के नाम पर गरीबों के घर उजाड़े जाएंगे।

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