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डॉक्टर दंपती के विवाद में हाईकोर्ट ने दिया बड़ा आदेश: बिना सबूत के आरोप मानसिक क्रूरता, पत्नी को देना होगा 25 लाख गुजारा भत्ता
रायपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिना ठोस सबूत के जीवनसाथी पर अवैध संबंधों जैसे गंभीर आरोप लगाना मानसिक क्रूरता मानते हुए तलाक का आदेश दिया है। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस ए.के. प्रसाद की पीठ ने पति की अपील मंजूर करते हुए पत्नी को 25 लाख रुपए गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। दोनों ही पेशे से डॉक्टर हैं।
सारंगढ़ के डॉक्टर पति और भिलाई निवासी डॉक्टर पत्नी की शादी 2008 में रायगढ़ में हुई थी। विवाह के बाद उनकी एक बेटी हुई, लेकिन कुछ ही समय बाद रिश्तों में दरार आ गई। 2014 से दोनों अलग रह रहे थे। पति का आरोप था कि पत्नी का व्यवहार लगातार अपमानजनक और संदेहपूर्ण हो गया। छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करना, सिंदूर न लगाने और मंगलसूत्र न पहनने से इनकार करना और पति पर जबरन अवैध संबंधों के आरोप लगाना पति के लिए मानसिक प्रताड़ना बन गया। इसी आधार पर पति ने दुर्ग फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने माना मानसिक क्रूरता
हाईकोर्ट ने अपील की सुनवाई में पाया कि पत्नी ने पति पर अन्य महिला के साथ संबंधों का आरोप लगाया, लेकिन इस आरोप को साबित नहीं कर सकी। कोर्ट ने कहा कि शिक्षित भारतीय पत्नी द्वारा बिना आधार और सबूत के चरित्र हनन करना क्रूरता का सबसे बुरा रूप है, जिससे पति को मानसिक पीड़ा हुई। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अप्रैल 2019 में दोनों ने साथ में फिल्म देखी थी, इसलिए अलग रहने के आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता। हालांकि, मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक मंजूर कर दिया गया।
गुजारा भत्ता और आगे की कार्रवाई
हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों ही डॉक्टर हैं और आर्थिक रूप से सक्षम हैं। पति को आदेश दिया गया कि वह पत्नी को 25 लाख रुपए एकमुश्त गुजारा भत्ता 6 महीने के भीतर दें। यह राशि बेटी की परवरिश और भविष्य की कानूनी झंझट से बचने के लिए तय की गई है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
