बिलासपुर भू-अभिलेख शाखा में अधीक्षक का सिक्का, छह साल से एक ही कुर्सी पर कब्जा

बिलासपुर भू-अभिलेख शाखा में अधीक्षक का सिक्का, छह साल से एक ही कुर्सी पर कब्जा

बिलासपुर। न्यायधानी के भू-अभिलेख कार्यालय में एक अधिकारी का रुतबा ऐसा है कि सरकारें बदल गईं लेकिन उनकी कुर्सी नहीं हिली। पिछले छह साल से अधीक्षक खिलेंद्र सिंह यादव यहां अंगद के पांव की तरह जमे हुए हैं। अब इनके खिलाफ कलेक्टर से गंभीर शिकायत की गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि साहब ने शासन की आंखों में धूल झोंककर अपनी कुर्सी बचा रखी है और दफ्तर को वसूली का अड्डा बना दिया है।

नियमों को ठेंगा, रसूख के दम पर वापसी

नियम के मुताबिक किसी भी अधिकारी को एक ही जगह तीन साल से ज्यादा नहीं रहना चाहिए। लेकिन खिलेंद्र सिंह यादव छह साल से बिलासपुर में ही डटे हैं। तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण ने शिकायतें मिलने पर इनका तबादला पचपेड़ी तहसीलदार के रूप में किया था। चर्चा है कि यादव ने अपने रसूख के दम पर महज एक रात में आदेश बदलवाया और वापस बिलासपुर आ गए। शिकायत में आरोप है कि जब शासन ने पदस्थापना की जानकारी मांगी, तो उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह करते हुए खुद को नया बता दिया।

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डेटा चोरी के आरोप में हुए थे निलंबित

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यह पहली बार नहीं है जब श्री यादव विवादों में हैं। जुलाई 2023 में जिला स्तरीय बाबू भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी होने से पहले ही मेरिट सूची पेन ड्राइव में चोरी करने के आरोप उन पर लगे थे। तत्कालीन कलेक्टर सौरभ कुमार ने जांच करवाई और दोषी पाए जाने पर उन्हें निलंबित कर दिया था। निलंबन के दौरान उन्हें रायपुर अटैच किया गया था। लेकिन जैसे ही कलेक्टर सौरभ कुमार का तबादला हुआ, साहब ने फिर जुगाड़ लगाया और उसी मलाईदार कुर्सी पर वापस लौट आए।

जमीन के खेल में मास्टरी और वसूली के आरोप

सूत्र बताते हैं कि राजस्व विभाग के असली खेल के पीछे यही चेहरा है। विवादित जमीनों की खरीदी-बिक्री पर लगी रोक हटाने के नाम पर मोटी रकम वसूलने के आरोप उन पर लगते रहे हैं। सीमांकन के काम में भी इनका सीधा दखल है। आरोप है कि वे सीमांकन दल पर दबाव डालकर एकतरफा रिपोर्ट बनवाते हैं। पहले डायवर्सन का काम भी यही देखते थे, लेकिन शिकायतों के बाद तत्कालीन कलेक्टर ने यह जिम्मेदारी उनसे छीनकर तहसीलदारों को सौंप दी थी।

ट्रांसफर-पोस्टिंग की दुकान और मीडिया का साथ

पटवारियों और आरआई के तबादलों में भी साहब का दखल रहता है। शिकायत है कि तबादला सूची जारी होने से पहले ही लीक कर दी जाती है और मनचाही पोस्टिंग के लिए सौदेबाजी होती है। खबर तो यह भी है कि शहर के कुछ रसूखदार लोग और मीडियाकर्मी भी इस खेल में उनके साझीदार हैं। फिलहाल शिकायत कलेक्टर के पास है। अब देखना होगा कि इस रसूखदार अधिकारी पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या फिर जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति होकर रह जाएगी।

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