राजधानी के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई सीजीएमएससी की घोर लापरवाही से गर्भवती महिलाओं के लिए जांच किट और दवाइयों का टोटा

राजधानी के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई सीजीएमएससी की घोर लापरवाही से गर्भवती महिलाओं के लिए जांच किट और दवाइयों का टोटा

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े दावों की जमीनी हकीकत बेहद चौंकाने वाली है। शहर के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इन दिनों मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस पूरी लचर व्यवस्था में सबसे ज्यादा खराब स्थिति गर्भवती महिलाओं की हो गई है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन यानी सीजीएमएससी द्वारा अस्पतालों में जरूरी जांच किट और जीवन रक्षक दवाइयों की सप्लाई लगभग ठप कर दी गई है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि मरीजों को बाहर से महंगे दामों पर किट खरीदकर लानी पड़ रही है या फिर मजबूरी में दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। हद तो यह है कि सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन लगवाने के लिए मरीजों को निडिल भी खुद ही निजी मेडिकल स्टोर से खरीदकर लानी पड़ रही है।

स्वास्थ्य विभाग के कड़े दिशा निर्देशों के अनुसार गर्भवती महिलाओं के लिए गर्भावस्था के शुरुआती दौर में सिकलिन और एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियों की जांच होना अत्यंत आवश्यक होता है। इससे गर्भवती स्त्री और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। लेकिन रायपुर के कई स्वास्थ्य केंद्रों में इन अति महत्वपूर्ण जांच किट की भारी कमी बनी हुई है। इन किट के अभाव में महिलाओं की समय पर जांच नहीं हो पा रही है जिससे उनके स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा कई स्वास्थ्य केंद्रों में सामान्य बुखार की दवा पैरासिटामोल और मधुमेह रोगियों के लिए शुगर जांच किट की भी भारी किल्लत चल रही है।

बोरियाखुर्द हमर क्लिनिक का हाल बेहाल

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राजधानी के बोरियाखुर्द इलाके में संचालित हमर क्लिनिक खुद ही अव्यवस्था का शिकार नजर आ रहा है। इस क्लिनिक में इन दिनों शुगर जांच किट पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। इस वजह से यहां अपना इलाज कराने आने वाले मरीजों की शुगर जांच नहीं हो पा रही है और उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। दवाओं की बात करें तो यहां बुखार की सबसे सामान्य दवा पैरासिटामोल टेबलेट तक की सप्लाई नहीं हो रही है। इस क्लिनिक की एक और बड़ी खामी यह है कि यहां कोई अधिकृत फार्मासिस्ट ही मौजूद नहीं है। इस कारण दवा वितरण का संवेदनशील काम नर्सों और अस्पताल के अन्य स्टाफ द्वारा किया जा रहा है।

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मठपुरैना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में निडिल तक मयस्सर नहीं

मठपुरैना स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति और भी ज्यादा हैरान करने वाली है। इस केंद्र में इन दिनों मरीजों को लगाए जाने वाले इंजेक्शन की निडिल की सप्लाई ठप पड़ी है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में जो थोड़ी बहुत निडिल बची है उसे केवल आपातकालीन स्थितियों और प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं के लिए ही सुरक्षित रखा गया है। इसके चलते जो भी सामान्य मरीज यहां इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं उन्हें बाहर की दुकानों से निडिल खरीदकर लाने को कहा जा रहा है जो गरीब मरीजों की जेब पर भारी पड़ रहा है।

भाठागांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच प्रभावित

भाठागांव इलाके के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी सीजीएमएससी से मिलने वाली दवाइयों और जांच किट की सप्लाई लंबे समय से बाधित है। यहां मुख्य रूप से सिकलिन और एचआईवी की जांच किट उपलब्ध नहीं है। पर्याप्त जांच सामग्री न होने के कारण अस्पताल में पैथोलॉजी जांच का काम पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है। अस्पताल के स्टाफ द्वारा जांच के लिए आने वाले मरीजों को साफ तौर पर बाहर से किट खरीदकर लाने की सलाह दी जाती है।

सीएमएचओ का आश्वासन

इस पूरे गंभीर मामले में रायपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मिथिलेश चौधरी का कहना है कि जब भी उनके पास इस प्रकार की दवाइयों या किट की कमी की शिकायतें आती हैं तो जल्द ही उस समस्या का समाधान किया जाता है। उन्होंने कहा कि अभी भी राजधानी के जिन स्वास्थ्य केंद्रों में जांच किट और दवाइयों की कमी बनी हुई है वहां बहुत जल्द ही सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों के इस दावे के बाद भी जमीनी स्तर पर मरीजों को राहत मिलने का इंतजार है।

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