खाकी के खौफ और रसूख के आगे एक और मौत! मिक्की मेहता के बाद अब इंसाफ मांगने वाले भाई माणिक की भी रहस्यमयी विदाई
रायपुर। राजधानी के इंद्रप्रस्थ इलाके में मिली लाश महज एक और पुलिस केस नहीं है। यह उस खौफनाक साजिश का आखिरी अध्याय है, जिसने छत्तीसगढ़ के सत्ता प्रतिष्ठान और पुलिस महकमे के रसूखदार चेहरों को बेनकाब किया था। यह लाश माणिक मेहता की है। वही माणिक, जिसने अपनी बहन डॉ. मिक्की मेहता की संदिग्ध मौत का इंसाफ मांगने के लिए पूरी जिंदगी दांव पर लगा दी। सवाल उठ रहा है कि क्या यह एक सामान्य मौत है या फिर खाकी के खौफनाक चेहरे ने अपने खिलाफ उठने वाली आखिरी आवाज को भी हमेशा के लिए खामोश कर दिया है?
एम्स में पहरा, सहमे परिजन और पुलिस की रहस्यमयी चुप्पी
इस मौत के बाद जो कुछ हो रहा है, वह किसी फिल्मी मर्डर मिस्ट्री से ज्यादा डरावना है। एम्स अस्पताल के बाहर पुलिस का सख्त पहरा चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। पुलिस के आला अधिकारी मीडिया से नजरें चुरा रहे हैं। एम्स के गार्ड्स को सख्त हिदायत है कि कोई तस्वीर बाहर न जाए। हद तो तब हो गई जब दुबई से आई माणिक की सगी बहन और जीजा ने भी होंठ सिल लिए। अपनों की लाश सामने है, लेकिन खाकी और सत्ता का खौफ इस कदर हावी है कि कोई एक शब्द बोलने को तैयार नहीं।
एक रसूखदार आईपीएस और 25 साल पुरानी खूनी फाइल
आखिर माणिक की मौत से किसे फायदा होगा? इस सवाल का जवाब उस पच्चीस साल पुरानी फाइल में दफन है, जिसमें एक विवादित और रसूखदार तत्कालीन आईपीएस मुकेश गुप्ता का नाम गूंजता रहा है। दुर्ग में मिक्की मेहता से उस आईपीएस के संपर्क, पहली पत्नी के रहते गंधर्व विवाह और एक बेटी के दावों ने राजनीति में भूचाल ला दिया था। 2001 में मिक्की की जहरीले इंजेक्शन से रहस्यमयी मौत हुई। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताकर रसूखदारों को बचाने के लिए फाइल रफा-दफा कर दी। लेकिन माणिक ने हार नहीं मानी।
1400 पन्नों की रिपोर्ट और 'गुम डायरी' का विस्फोट
सत्ता बदली तो एसआईटी का गठन हुआ। 1400 पन्नों की रिपोर्ट ने महकमे की चूलें हिला दीं। सबसे बड़ा धमाका तब हुआ जब 17 साल से गायब 'गुम डायरी' सामने आई। उसमें मिक्की की मौत और सफेदपोशों के काले कारनामे दर्ज थे। पूर्व डीजी गिरधारी नायक की जांच ने साबित किया कि शुरुआती जांच में पुलिस ने जानबूझकर एक बड़े चेहरे को बचाने के लिए भयानक धांधली की थी।
क्या माणिक के साथ श्मशान में राख हो जाएगा सच?
माणिक का परिवार इसी सड़े हुए सिस्टम से लड़ता रहा। उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया गया, प्रताड़ित किया गया। दबाव में उनकी मां घुट-घुट कर मर गईं। और अब माणिक की लाश मिलना कोई इत्तेफाक नहीं हो सकता। यह सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है। जिस तरह पुलिस लीपापोती कर रही है, उससे साफ है कि मिक्की मेहता केस का सच अब माणिक के साथ ही श्मशान में राख हो जाएगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि रसूख के इस खौफनाक खेल में खाकी और कितने खून पीकर अपनी प्यास बुझाएगी?
