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वन्य जीवन पर बढ़ता खतरा: ओडिशा से भटककर गरियाबंद पहुँची हथिनी की दर्दनाक मौत, पोटाश बम से मुंह में आई गंभीर चोटें
गरियाबंद: ओडिशा से भटककर छत्तीसगढ़ के उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व में पहुँची एक हथिनी की दर्दनाक मौत हो गई। वन विभाग और पशु चिकित्सकों की सात दिन तक निरंतर देखरेख के बावजूद यह हथिनी बच नहीं पाई। जानकारी के अनुसार, यह लगभग 10–12 साल की हथिनी थी और उसके मुंह में गंभीर चोटें लगी थीं। वन विभाग की टीम ने उसके इलाज के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन दुर्भाग्यवश उसे बचाया नहीं जा सका।
पोटाश बम: हाथियों के लिए जानलेवा खतरा
वन अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय कुछ असामाजिक तत्व हाथियों को नुकसान पहुँचाने के लिए भोजन में पोटाश बम डालते हैं, जिसे खाने के बाद हाथी गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। यही कारण था कि यह हथिनी भी गंभीर रूप से घायल हुई थी। 22 दिसंबर को वन विभाग की सुरक्षा टीम ने इस घायल हथिनी का पता लगाया था। तब से उसकी सतत देखरेख और इलाज किया जा रहा था। हालांकि 15 जनवरी को उसकी हालत अचानक बिगड़ गई और 18 जनवरी की देर शाम उसने दम तोड़ दिया।
वन विभाग की कार्रवाई और पोस्टमार्टम
वन विभाग ने हथिनी के मृत शरीर का पोस्टमार्टम कर उसे दफनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारी इस घटना को गंभीर मानते हुए वन्यजीवन संरक्षण और हाथियों की सुरक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाने की अपील कर रहे हैं।
वन्य जीवन संरक्षण की चुनौतियाँ
यह दुखद घटना हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि वन्यजीवन संरक्षण कितनी बड़ी चुनौती है। हाथियों जैसे जंगली जीवों की सुरक्षा के लिए सतत जागरूकता, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और कड़े कानूनी उपाय बेहद आवश्यक हैं।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
