बाइक पर जीपीएस और डिपो में कोयला: गेवरा खदान से हो रही बड़ी चोरी, कागजों में साइडिंग और असलियत में बिलासपुर पहुंच रहा माल

कोरबा। गेवरा कोयला खदान से निकलने वाला सरकारी कोयला साइडिंग पहुंचने से पहले ही रास्ते में गायब हो रहा है। कोयला चोरी का एक ऐसा सनसनीखेज तरीका सामने आया है जिसने पुलिस और सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। दीपका क्षेत्र से लेकर बिलासपुर के कोल डिपो तक फैले इस काले कारोबार में ट्रक के जीपीएस को निकालकर बाइक पर लगा दिया जाता है ताकि कंपनी को लगे कि ट्रक सही रास्ते पर है। जबकि असलियत में कोयले से लदे ट्रक बिलासपुर के निजी डिपो में खाली हो रहे होते हैं। दीपका पुलिस ने तीन दिनों से पांच-छह ट्रकों को थाने में खड़ा तो किया है लेकिन सूत्रों का कहना है कि असली खेल करने वाले ट्रांसपोर्टरों और रसूखदारों को बचाने की तैयारी चल रही है।

 

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जीपीएस का अनोखा खेल: बाइक घूमती रही साइडिंग पर और ट्रक बिक गया बिलासपुर में

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कोयला चोरी का यह पूरा नेटवर्क इतना शातिर है कि तकनीक को भी झांसा दे दिया गया। गेवरा से अडानी पावर के लिए कोयला लेकर निकले ट्रकों को साइडिंग पहुंचने से पहले ही रोक दिया जाता था। वहां से ट्रक का जीपीएस सिस्टम निकालकर एक मोटरसाइकिल पर फिट कर दिया जाता। बाइक सवार साइडिंग के चक्कर लगाता जिससे कंप्यूटर में लोकेशन सही दिखती और कागजों में कोयला पहुंचना दर्ज हो जाता। इस दौरान असली ट्रक बिलासपुर के मोहदा मोड़ और पेंड्रीडीह के निजी डिपो में कोयला खपा देते थे। इस पूरे खेल में तिवरता ट्रांसपोर्ट जैसे बड़े नाम संदेह के घेरे में हैं क्योंकि उनके खुद के भी कोल डिपो बिलासपुर में मौजूद हैं।

 

पुलिस की कार्रवाई पर सवाल: ड्राइवरों को पकड़ा और मालिकों से सेटिंग का आरोप

दीपका पुलिस ने इस मामले में पांच ड्राइवरों लक्ष्मण कुमार, तुषार खंडे, गोपी किशन, दुर्गेश और अतीक मेमन को पकड़ा है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिन ट्रांसपोर्टरों और ट्रक मालिकों के बिना इतना बड़ा घोटाला मुमकिन नहीं था उन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सूत्रों का दावा है कि दीपका थानेदार और बड़े ट्रांसपोर्टरों के बीच लेनदेन का खेल चल रहा है और इसीलिए ट्रक मालिक सीना ठोककर कह रहे हैं कि सोमवार तक उनकी गाड़ियां छूट जाएंगी। सवाल यह उठता है कि क्या ड्राइवर अपनी मर्जी से लाखों का कोयला गायब कर सकते हैं या फिर उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

पुलिस ने जांच के दौरान जिन गाड़ियों को थाने में खड़ा किया है उनमें मुख्य रूप से ये ट्रेलर शामिल हैं:

ट्रेलर वाहन क्रमांक CG 12 BG 5024

ट्रेलर वाहन क्रमांक CG 12 BQ 9913

ट्रेलर वाहन क्रमांक CG 12 BJ 4253

ट्रेलर वाहन क्रमांक CG 15 EH 2713

ट्रेलर वाहन क्रमांक CG 10 BP 5301

ट्रेलर वाहन क्रमांक CG 10 BU 9401

 

सिस्टम की चुप्पी और लाखों का नुकसान

इस पूरे मामले में अडानी पावर और कोल लिफ्टरों की भूमिका की अगर ईमानदारी से जांच हो तो कई बड़े सफेदपोश बेनकाब हो सकते हैं। एक कर्मचारी ने दबी जुबान में बताया कि जब तक ट्रक तय जगह नहीं पहुंचता तब तक टीपी यानी ट्रांजिट पास बंद नहीं हो सकता। इसके बावजूद अगर टीपी क्लोज हो रहा है तो इसका मतलब है कि सिस्टम के अंदर बैठे लोग भी इस कालिख में डूबे हुए हैं। फिलहाल पुलिस की जांच की सुई सिर्फ छोटे ड्राइवरों तक सीमित है जबकि असली मगरमच्छ खुलेआम घूम रहे हैं।

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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