लाखों फूंकने के बाद भी धूल फांक रहे फाइव स्टार ब्लू टॉयलेट, सात ठिकानों पर तो काम शुरू तक नहीं हो पाया

रायपुर। स्मार्ट सिटी का सपना दिखाकर शहर के व्यस्त बाजारों में बनाए गए 'ब्लू टॉयलेट' अब सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। प्रशासन ने लाखों रुपए खर्च कर पुरुषों के लिए फाइव स्टार होटल जैसी सुविधा देने का वादा किया था, लेकिन देखरेख के अभाव में ये टॉयलेट अब कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं। हालात इतने बुरे हैं कि पंडरी जैसे व्यस्त मार्केट में लोगों को बुनियादी सुविधा के लिए भी भटकना पड़ रहा है, जबकि सात अन्य जगहों पर तो निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो सका।

शहर के व्यस्ततम इलाकों में लोगों को लग्जरी अनुभव देने के लिए अर्बन लाउंज यानी ब्लू टॉयलेट की योजना जमीन पर उतारी गई थी। नगर निगम और स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिकारियों ने दावा किया था कि इन टॉयलेट्स में मॉडर्न लाइटिंग, महंगे टाइल्स, सोफा, एलईडी टीवी और एटीएम जैसी सुविधाएं होंगी। हकीकत यह है कि आज इन लाउंज के ताले तक नहीं खुल रहे हैं।

 

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  •   हार्डवेयर गायब: वॉश बेसिन से लेकर नल और महंगे शीशे या तो टूट चुके हैं या गायब हैं।
  •   गंदगी का अंबार: नियमित सफाई न होने से परिसर में भीषण बदबू और कचरा जमा है।
  •  सुविधाएं नदारद: टीवी और सोफे की बात तो दूर, यहां पानी तक की व्यवस्था नहीं है।
  •   ताले लटके: करोड़ों का प्रोजेक्ट होने के बावजूद गेट पर ताले लटके रहते हैं।

 

पंडरी मार्केट में व्यापारी और ग्राहक परेशान

पंडरी कपड़ा मार्केट में रोजाना हजारों की भीड़ उमड़ती है। यहां के व्यापारी बताते हैं कि कहने को तो यह फाइव स्टार टॉयलेट है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। दूर-दराज से आने वाले ग्राहकों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। मजबूरी में लोग खुले में या आसपास की गलियों में जाने को मजबूर हैं।

 

कागजों में ही रह गईं ये 7 जगहें

योजना के मुताबिक शहर के 8 मुख्य क्षेत्रों को चुना गया था, जिनमें से केवल एक-दो जगह ही ढांचा खड़ा हो पाया। बाकी 7 जगहों पर काम ठप पड़ा है:

  1.  शास्त्री बाजार
  2.   मालवीय रोड
  3.   गोल बाजार
  4.   महालक्ष्मी कपड़ा मार्केट
  5.   बस स्टैंड
  6.  राजेन्द्र नगर
  7.   पंडरी का दूसरा हिस्सा

 

क्या कहते हैं जिम्मेदार

नगर निगम के संबंधित जोन कमिश्नर ने बताया कि रखरखाव के लिए एजेंसी को निर्देश दिए गए हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। वहीं सूत्रों का कहना है कि बजट की कमी और ठेकेदारों की लापरवाही की वजह से यह पूरी योजना फ्लॉप होने की कगार पर है। जनता के टैक्स का पैसा अब सिर्फ लोहे और कंक्रीट के खंडहरों में नजर आ रहा है।

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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