शराब घोटाले में ईडी का अब तक का सबसे बड़ा एक्शन पूर्व आबकारी कमिश्नर समेत 30 अफसरों की संपत्तियां कुर्क
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। ईडी ने पूर्व आबकारी कमिश्नर निरंजन दास और 30 अन्य अधिकारियों की 38 करोड़ रुपये से ज्यादा की चल अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। जांच एजेंसी की इस कार्रवाई से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। ईडी का दावा है कि इस पूरे सिंडिकेट ने मिलकर सरकारी खजाने को करीब 2800 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है जिसमें अफसरों के आलीशान बंगले से लेकर दुकानें तक सरकारी कब्जे में आ गई हैं।
अफसरों की ठाठ-बाट पर चला सरकारी डंडा
ईडी ने इस कार्रवाई में कुल 78 अचल और 197 चल संपत्तियों को अपने घेरे में लिया है। जब्त की गई चीजों में बड़े अफसरों के आलीशान बंगले महंगे फ्लैट और व्यावसायिक दुकानें शामिल हैं। इसके अलावा कई एकड़ कृषि भूमि को भी कुर्क किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह सारी जायदाद भ्रष्टाचार की कमाई से बनाई गई थी। शराब घोटाले के जरिए कमाए गए पैसों को अलग-अलग जगहों पर निवेश किया गया था जिसे अब ईडी ने ढूंढ निकाला है।
2800 करोड़ का खेल और सिंडिकेट का जाल
ईडी की जांच में यह साफ हुआ है कि छत्तीसगढ़ में शराब का धंधा सरकारी नियमों से नहीं बल्कि एक खास सिंडिकेट के इशारे पर चल रहा था। इस खेल में आबकारी विभाग के बड़े अधिकारियों के साथ कुछ रसूखदार कारोबारी और नेता भी शामिल थे। इन लोगों ने मिलकर सरकारी खजाने में आने वाले राजस्व को अपनी जेबों में भरा जिससे सरकार को 2800 करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी नुकसान उठाना पड़ा। घोटाले की जड़ें इतनी गहरी हैं कि अब एक के बाद एक कड़ियां जुड़ती जा रही हैं।
अभी और गिरेंगी गाज जांच का दायरा बढ़ेगा
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ईडी की यह कार्रवाई तो सिर्फ एक शुरुआत है। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नामों पर शिकंजा कसा जा सकता है। ईडी की टीम अभी भी मनी ट्रेल यानी पैसों के लेनदेन की बारीकी से पड़ताल कर रही है। अफसरों की बेनामी संपत्तियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। शराब घोटाले की इस आंच ने अब उन लोगों की नींद उड़ा दी है जो अब तक खुद को कानून से ऊपर समझ रहे थे।
