जल संसाधन विभाग में करोड़ों का महाघोटाला : दिसंबर 2025 में विधानसभा में गूंजा था मामला, फिर भी विभाग ने छिपाई EE ललित राउटे की जानकारी; 18 करोड़ की गड़बड़ी से शासन की छवि धूमिल

जल संसाधन विभाग में करोड़ों का महाघोटाला : दिसंबर 2025 में विधानसभा में गूंजा था मामला, फिर भी विभाग ने छिपाई EE ललित राउटे की जानकारी; 18 करोड़ की गड़बड़ी से शासन की छवि धूमिल

रायपुर/NJV डेस्क: एक तरफ जहां राज्य शासन पारदर्शी प्रशासन और भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाकर विकास कार्यों को गति देने का दावा कर रहा है, वहीं जल संसाधन विभाग से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसमें अफसरशाही की घोर मनमानी और शासन की आंखों में धूल झोंकने का खेल उजागर हुआ है। जल प्रबंधन संभाग क्रमांक 1 के कार्यपालन अभियंता (EE) ललित राउटे पर करोड़ों रुपयों की वित्तीय अनियमितता के जो गंभीर आरोप लगे हैं, उसकी गूंज दिसंबर 2025 में विधानसभा के पटल पर भी सुनाई दी थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि विभाग के आला अधिकारियों ने सदन को गुमराह करते हुए ईई ललित राउटे को बचाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां ही छिपा लीं।

इस पूरे गड़बड़झाले में ठेकेदारों से मिलीभगत कर 5 प्रमुख अनियमितताएं सामने आई हैं, जो सीधे तौर पर एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती हैं:

 

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 बोरी जलाशय: बिना बैंक वेरिफिकेशन लौटा दी अतिरिक्त सुरक्षा निधि

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अनुबंध क्रमांक 16 के तहत बोरी जलाशय के रिनोवेशन और मरम्मत कार्य में ईई ललित राउटे ने भारी अनियमितता बरती। लोक निर्माण विभाग (PWD) कोड नियमावली के स्पष्ट निर्देश हैं कि अतिरिक्त सुरक्षा निधि (परफॉरमेंस गारंटी) केवल सत्यापित बैंक प्रतिवेदन और उच्चाधिकारियों की पूर्व अनुमति के बाद ही जारी की जा सकती है। इसके बावजूद, राउटे ने बिना किसी बैंक वेरिफिकेशन के अतिरिक्त सुरक्षा निधि की राशि अनधिकृत रूप से जारी कर दी। पूर्व शिकायतों के बावजूद ठेकेदार को फायदा पहुंचाया गया, जिससे सरकारी खजाने को लाखों की चपत लगी।

 

 अनुबंध क्रमांक 29: बिना मापन और ऑडिट के करोड़ों का भुगतान

 

भ्रष्टाचार का दूसरा बड़ा मामला अनुबंध क्रमांक 29 का है। इसमें अतिरिक्त सुरक्षा निधि के बैंक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हुए बिना ही न सिर्फ चालू (रनिंग) बिल पास किए गए, बल्कि अंतिम भुगतान की प्रक्रिया भी समाप्त कर दी गई। पीडब्ल्यूडी कोड के खंड 4.048 एवं 5.12 के तहत भुगतान से पहले कार्य का मापन (Measurement), गुणवत्ता जांच और पूर्ण ऑडिट अनिवार्य है। लेकिन राउटे ने नियमों की अनदेखी कर बिना एम-बुक (MB) के ठेकेदार को करोड़ों का अनुचितहै लाभ पहुंचा दिया।

 

अनुरक्षण के नाम पर है करोड़ की फर्जी बुकिंग

 

जल प्रबंधन संभाग क्रमांक 1 में वार्षिक अनुरक्षण और मरम्मत के नाम पर एक ही वर्ष में 18 करोड़ रुपये की अनियमित बुकिंग की गई। कैग (CAG) की 2018-19 की समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार बजट सीमा, कार्य प्रगति प्रमाण-पत्र और तकनीकी स्वीकृति के बिना ये कार्य नहीं हो सकते। ईई राउटे ने निर्धारित योजनाओं से कहीं ज्यादा के फर्जी मरम्मत बिल तैयार कराकर विभागीय फंड का जमकर दुरुपयोग किया।

 

टीला एनीकट: कंक्रीट की जगह बिछा दिए बोल्डर

 

टीला एनीकट के समीप तटबंध (Pitching) निर्माण में ड्राइंग व डिजाइन के बिल्कुल विपरीत काम कराया गया। ठेकेदार ने मिलीभगत कर बोल्डर बिछाकर उसके ऊपर कंक्रीट की एक बेहद पतली परत चढ़ा दी। कंक्रीट की मोटाई आठ मीटर से कम कर दी गई और पूरा भुगतान निकाल लिया गया। यह सिविल दरें अनुसूची 2018-19 का सीधा उल्लंघन है।

 

डतरेंगा एनीकट: विधानसभा में उठा सवाल, फिर भी एस्टीमेट में हेराफेरी

डतरेंगा एनीकट के सिल्ट क्लीनिंग कार्य में गजब की हेराफेरी की गई। यहां खुदाई में निकली 'रेत' को एस्टीमेट में 'हार्ड मिट्टी' (कठोर मिट्टी) बताकर 50 से 60 रुपये प्रति घन मीटर की अतिरिक्त दर से भुगतान लिया गया, जबकि नियमानुसार सॉफ्ट मिट्टी की दर लागू होनी थी। चौंकाने वाली बात यह है कि खोदी गई रेत की रॉयल्टी जमा की गई, लेकिन बिलिंग हार्ड मिट्टी की हुई।दिसंबर 2025 में विधानसभा में इसी भ्रष्टाचार से जुड़ा प्रश्न लगा था, लेकिन विभाग ने ईई राउटे को बचाने के लिए जानकारी ही छिपा ली।साफ-सुथरी छवि बरकरार रह सके।

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