रेरा चेयरपर्सन संजय शुक्ला के खिलाफ केंद्र का बड़ा एक्शन जांच के निर्देश 300 करोड़ की काली कमाई की शिकायत पीएमओ पहुंची

रेरा चेयरपर्सन संजय शुक्ला के खिलाफ केंद्र का बड़ा एक्शन जांच के निर्देश 300 करोड़ की काली कमाई की शिकायत पीएमओ पहुंची

रायपुर. छत्तीसगढ़ भू संपदा विनियामक प्राधिकरण यानी रेरा के कामकाज और चेयरपर्सन संजय शुक्ला की कार्यप्रणाली को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. भारत सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने रेरा अध्यक्ष के खिलाफ मिली गंभीर शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को पत्र लिखा है और मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही रेरा अध्यक्ष और रिटायर्ड आईएफएस अफसर संजय शुक्ला पर 300 करोड़ रुपये की काली कमाई करने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय में भी एक बड़ी शिकायत दर्ज कराई गई है. शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है.

केंद्र सरकार के पत्र में क्या है निर्देश

केंद्रीय मंत्रालय के हाउसिंग डिवीजन के अंडर सेक्रेटरी अरविंद जोसेफ सोरेंग के हस्ताक्षर से 27 मार्च 2026 को एक महत्वपूर्ण पत्र जारी किया गया है. यह पत्र नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ शासन के आवास एवं शहरी प्रशासन और विकास विभाग के सचिव को भेजा गया है. पत्र में शिकायतकर्ता नरेश चंद्र गुप्ता द्वारा 25 अक्टूबर 2025 को भेजे गए मूल पत्र का हवाला दिया गया है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भूमि एवं कॉलोनाइजेशन राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है इसलिए राज्य का आवास एवं पर्यावरण विभाग इस मामले की विस्तृत जांच कर आवश्यक कदम उठाए. केंद्र ने यह भी निर्देश दिया है कि जांच के बाद शिकायतकर्ता को भी कार्रवाई का उचित जवाब दिया जाए.

300 करोड़ की संपत्ति और पीएमओ में शिकायत

रेरा चेयरपर्सन संजय शुक्ला की अथाह संपत्ति की शिकायत सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंच गई है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता नरेश चंद्र गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह और सीबीआई को गोपनीय चिट्ठी भेजी है जिसे पीएमओ ने दर्ज कर आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया है. शिकायत में आरोप है कि संजय शुक्ला ने अपने पद का गलत इस्तेमाल कर भ्रष्टाचार का बड़ा साम्राज्य खड़ा किया है. यह भी बताया गया है कि संजय शुक्ला का नाम पहले से ही रावतपुरा मेडिकल यूनिवर्सिटी की मान्यता से जुड़े घोटाले में सीबीआई के आरोपियों की सूची में शामिल है इसके बावजूद सरकार ने उन्हें रेरा अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण कुर्सी पर बिठाए रखा.

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कहां कहां फैला है बेशकीमती संपत्तियों का जाल

शिकायतकर्ता ने संजय शुक्ला की 10 से ज्यादा बेशकीमती संपत्तियों की विस्तृत सूची सौंपी है. इनमें वीआईपी रोड पर 11 एकड़ में बना लग्जरी वेडिंग लॉन और होटलनुमा परिसर एयरपोर्ट रोड पर 4 एकड़ की कीमती जमीन सिरपुर रोड पर करीब 120 एकड़ का विशाल फार्म हाउस और नया रायपुर में 15 एकड़ जमीन शामिल है. इसके अलावा रिंग रोड नंबर 2 कबीर नगर में 9 एकड़ की प्लॉटिंग माना थाना क्षेत्र में 7 एकड़ जमीन शदानी दरबार के सामने 14 एकड़ की प्राइम लोकेशन वाली जमीन सिविल लाइंस में 5000 वर्गफुट का बड़ा प्लॉट मौलश्री विहार में आलीशान डुप्लेक्स मकान और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनियों में डुप्लेक्स मकान शामिल हैं.

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आईएफएस होकर आईएएस वाले पद और जमीनों का खेल

इस पूरे मामले में तत्कालीन मुख्य सचिव की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. आरोप है कि संजय शुक्ला मूलतः भारतीय वन सेवा के अफसर थे लेकिन उन्हें जानबूझकर ऐसे पद दिए गए जो आमतौर पर आईएएस अफसरों के लिए तय होते हैं. इन अफसरों का भ्रष्टाचार करने का तरीका बेहद शातिर था. ये पहले किसी इलाके में कम दाम पर जमीन खरीदते थे और फिर अपने रसूख का इस्तेमाल कर ठीक उसी इलाके में सरकारी हाउसिंग प्रोजेक्ट घोषित करवा देते थे. इससे उनकी जमीनों के रेट रातों रात आसमान छूने लगते थे.

तालपुरी प्रोजेक्ट में धांधली और ईडी की जासूसी

हाउसिंग बोर्ड में तैनाती के दौरान भी भारी वित्तीय अनियमितताएं की गईं. भिलाई के मशहूर तालपुरी प्रोजेक्ट में ठेकेदार को नियमों को ताक पर रखकर लगभग 70 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया. आरोप है कि इसके बदले में करीब 20 करोड़ रुपये की रिश्वत ली गई. शिकायत में यह भी चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इन अफसरों के हौसले इतने बुलंद थे कि इन्होंने ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई रोकने की कोशिश की और एजेंसियों के दफ्तरों की जासूसी तक कराई. छापों पर नजर रखने के लिए बाकायदा ड्रोन उड़वाए गए.

रेरा में बिल्डरों को लाभ और आवंटियों की अनदेखी

संजय शुक्ला के कार्यकाल में रेरा की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं. रेरा का मूल उद्देश्य घर खरीदारों को बिल्डरों की धोखाधड़ी से बचाना है लेकिन आरोप है कि प्राधिकरण बिल्डरों के प्रति नरम रुख अपनाता रहा. कई मामलों में बिल्डरों पर भारी जुर्माना लगाने के बजाय उन्हें मोहलत दी गई. रेरा द्वारा बिल्डरों के खिलाफ रिफंड के आदेश पारित तो कर दिए जाते हैं लेकिन जब बिल्डर पैसे नहीं लौटाता तो संपत्ति कुर्क करने या रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करने में भारी लेटलतीफी की जाती है. बिना रेरा रजिस्ट्रेशन के अवैध प्लॉटिंग पर प्रबंधन की चुप्पी और अपीलीय ट्रिब्यूनल के आदेशों की अवहेलना के मामले भी आम रहे हैं.

अब सीबीआई जांच की मांग

शिकायतकर्ता नरेश गुप्ता ने कहा है  कि राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्ल्यू इस मामले में पूरी तरह नाकाम रही हैं. कई शिकायतें आने के बाद भी रसूख के चलते उन्हें दबा दिया गया. अफसरों का प्रभाव इतना ज्यादा है कि बिना स्वतंत्र एजेंसी के सच सामने नहीं आ सकता इसलिए पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है. केंद्र सरकार के पत्र के बाद अब राज्य के आवास एवं पर्यावरण विभाग पर इस वीवीआईपी शिकायत पर निष्पक्ष जांच बैठाने और कड़ी कार्रवाई करने का भारी दबाव बढ़ गया है.

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