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Bijapur Mega Operation: डेडलाइन के आखिरी दिन नक्सल नेटवर्क पर सबसे बड़ा प्रहार, जंगलों में छिपा 14 करोड़ का खजाना बरामद, 25 लाल आतंक ने डाले हथियार
बीजापुर : छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों को नक्सल विरोधी अभियान में अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है। घने जंगलों में छिपाए गए विशाल नक्सली डंप का भंडाफोड़ करते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने भारी मात्रा में नकदी, सोना और अत्याधुनिक हथियार बरामद किए हैं, जिससे नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
बीजापुर के ताड़पला-कर्रेगुट्टा क्षेत्र में चलाए गए ऑपरेशन के दौरान लगभग 14 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की गई। इसमें करीब 2.90 करोड़ रुपये नकद और लगभग 7.2 किलोग्राम सोना शामिल है, जिसकी अनुमानित कीमत 11 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। यह बरामदगी देश में अब तक की सबसे बड़ी नक्सल डंप रिकवरी में से एक मानी जा रही है।
सुरक्षाबलों ने मौके से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की है। इनमें AK-47, SLR, INSAS राइफल, LMG, बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL), डेटोनेटर और बड़ी संख्या में कारतूस शामिल हैं। यह जखीरा नक्सलियों की रणनीतिक तैयारियों और उनकी क्षमताओं को दर्शाता है। इस ऑपरेशन की एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि बीजापुर क्षेत्र में 25 सक्रिय नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। ये नक्सली अपने साथ 90 से अधिक हथियार लेकर सामने आए, जो सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।
सिर्फ बीजापुर ही नहीं, बल्कि बस्तर संभाग के अन्य जिलों दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर में भी बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई। विभिन्न जिलों में कुल मिलाकर 30 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और कई स्थानों से हथियारों के बड़े जखीरे बरामद किए गए। दंतेवाड़ा में इनामी नक्सलियों के आत्मसमर्पण के साथ-साथ हथियारों का बड़ा स्टॉक मिला, जबकि नारायणपुर में भी सुरक्षा बलों ने नक्सल डंप का खुलासा कर कई घातक हथियार जब्त किए। सुकमा में इनामी नक्सलियों ने ऑटोमैटिक हथियारों के साथ सरेंडर किया, जिससे वहां भी नक्सली नेटवर्क कमजोर पड़ा।
कांकेर जिले में भी अंतिम चरण में दो नक्सलियों के आत्मसमर्पण के साथ अभियान को मजबूती मिली। इस समन्वित कार्रवाई को नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। 31 मार्च की निर्धारित समयसीमा के अंतिम दिन हुई इस व्यापक कार्रवाई ने नक्सल विरोधी अभियान को नई दिशा दी है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस ऑपरेशन से नक्सलियों की आर्थिक और सैन्य क्षमता को गहरा आघात पहुंचा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में नकदी, सोना और हथियारों की बरामदगी न केवल नक्सली गतिविधियों को कमजोर करेगी, बल्कि भविष्य में उनके नेटवर्क को पुनर्गठित करना भी कठिन बना देगी। यह ऑपरेशन छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों की रणनीति, खुफिया समन्वय और लगातार दबाव की नीति का परिणाम माना जा रहा है, जिसने नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
