मक्का बीज खरीदी में बड़ा खेल: सीजन बीतने के बाद गुजरात की फर्जी कंपनी को सवा सौ क्विंटल ज्यादा का ऑर्डर

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कृषि विभाग में मक्का बीज की खरीदी को लेकर करोड़ों के वारे-न्यारे का मामला सामने आया है। ताज्जुब की बात यह है कि जब मक्का बोने का समय निकल गया तब विभाग कुंभकर्णी नींद से जागा और बीज खरीदने के टेंडर जारी कर दिए। इस पूरे खेल में गुजरात की एक ऐसी कंपनी को फायदा पहुंचाया गया जिसका रायपुर में दफ्तर ही नहीं है और गुजरात में उसकी फैक्ट्री की जगह आलीशान बंगला बना हुआ है। सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए अफसरों और रसूखदारों ने मिलकर

 

 कागजों पर ही बीज की बुवाई का इंतजाम कर दिया है।

Read More बिलासपुर में अंगद के पांव की तरह जमे अधीक्षक, 6 साल से एक ही कुर्सी पर राज, कलेक्टर से शिकायत

कृषि विभाग के नियमों को ताक पर रखकर गुजरात की कर्णावती सीड्स को उपकृत किया गया है। विभाग ने यह खरीदी सरकारी रेट से 97 रुपए से लेकर 200 रुपए प्रति किलो तक महंगी दर पर की है। रबी सीजन के लिए मक्के की बुआई 15 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच हो जानी चाहिए थी लेकिन दिसंबर में करोड़ों के बीज खरीदना अफसरों की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

Read More सीपत में बिजली विभाग की बड़ी कार्रवाई: 27.56 लाख की बकाया राशि पर 103 कनेक्शन काटे, हड़कंप

 

कागजों पर दफ्तर और फैक्ट्री की जगह वीआईपी कॉलोनी

 

मीडिया की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जिस कर्णावती सीड्स को ठेका दिया गया उसका रायपुर में कोई अस्तित्व ही नहीं है। कंपनी ने भनपुरी और गोंदवारा के जो पते दिए वहां दूसरी कंपनियों के बोर्ड लगे हैं। हद तो तब हो गई जब गुजरात के अहमदाबाद स्थित रजिस्टर्ड पते की जांच की गई। वहां बीज की फैक्ट्री की जगह एक वीआईपी रहवासी कॉलोनी मिली। साफ है कि बिना भौतिक सत्यापन के ही चहेती कंपनी पर विभाग मेहरबान हो गया।

11 जिलों में जरूरत से ज्यादा बीज का ऑर्डर

दस्तावेजों से पता चला है कि 11 जिलों ने जानबूझकर तय सीमा से 27641 किलो ज्यादा बीज के टेंडर निकाले हैं। मोहला मानपुर जिले का उदाहरण देखें तो वहां सिर्फ 600 किलो बीज की जरूरत थी लेकिन अधिकारियों ने 8560 किलो बीज का ऑर्डर दे दिया। जब इस बारे में कृषि उप संचालकों से पूछा गया तो उन्होंने आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से मना कर दिया।

दिल्ली से फोन और तीन सहेली कंपनियों का सिंडिकेट

टेंडर की प्रक्रिया में भी गजब की सेटिंग देखने को मिली। हर जिले में सिर्फ तीन कंपनियों कर्णावती सीड्स महालक्ष्मी क्रॉपसाइंस और फॉर्म इंफोर्मेटिक्स ने हिस्सा लिया। इन तीनों के मालिक आपस में रिश्तेदार हैं। भास्कर के स्टिंग में एक कंपनी के संचालक ने कबूला कि यह तीनों फर्में एक ही हैं और उन्होंने दिल्ली के एक बड़े नेता से फोन करवाकर यह काम हासिल किया है। संचालक ने अपनी ऊंची पहुंच का हवाला देते हुए रिपोर्टर को धमकाने की कोशिश भी की।

इस पूरे मामले में कर्णावती के संचालक रौनक पटेल ने चुप्पी साध ली है। किसानों के नाम पर सरकारी पैसे की इस बंदरबांट ने विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब सवाल यह है कि जब बोनी का समय ही खत्म हो गया तो यह बीज क्या गोदामों में सड़ने के लिए खरीदे जा रहे हैं।

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

More News

सीएसपीडीसीएल में बड़ा खेल: बिना काम किए ही 120 कर्मचारियों का वेतन भुगतान तय, तीन दिन पहले ही रोस्टर चार्ट मंजूर

राज्य

शंकराचार्य विवाद पर बढ़ी सियासी-धार्मिक हलचल: कंप्यूटर बाबा ने द्रौपदी मुर्मू को लिखा पत्र, निष्पक्ष जांच की मांग शंकराचार्य विवाद पर बढ़ी सियासी-धार्मिक हलचल: कंप्यूटर बाबा ने द्रौपदी मुर्मू को लिखा पत्र, निष्पक्ष जांच की मांग
नई दिल्ली/प्रयागराज: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज मामले को लेकर देशभर में धार्मिक...
काशी के मणिकर्णिका घाट पर ‘मसान की होली’ को लेकर विवाद तेज, डोम राजा ने दी दाह संस्कार रोकने की चेतावनी
मेघालय विधानसभा में ‘सियासी जुगलबंदी’: विधायक पत्नी ने CM पति से मांगा प्रोजेक्ट का हिसाब
हरियाणा IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड केस: 590 करोड़ के घोटाले में मास्टरमाइंड समेत 4 गिरफ्तार, आज कोर्ट में पेशी
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘न्यायपालिका को बदनाम नहीं होने देंगे’, NCERT के ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ चैप्टर पर आपत्ति