राजधानी में फाइलों में कैद हुई 23 साल पुरानी योजना 8 करोड़ खर्च होने के बाद भी जनता के लिए बंद है इंदिरा स्मृति वन

राजधानी में फाइलों में कैद हुई 23 साल पुरानी योजना 8 करोड़ खर्च होने के बाद भी जनता के लिए बंद है इंदिरा स्मृति वन

रायपुर | राजधानी के दलदल सिवनी क्षेत्र में विकसित किया जा रहा इंदिरा स्मृति वन प्रशासनिक उपेक्षा और आपसी तालमेल की कमी का जीता जागता उदाहरण बन गया है। लगभग 23 साल पहले जिस योजना को शहर के एक बड़े हरित क्षेत्र और मनोरंजन पार्क के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था वह आज भी आम नागरिकों के लिए अधूरी है। करीब 8 करोड़ 28 लाख रुपए की मोटी रकम खर्च करने के बाद भी बिजली व्यवस्था और संचालन के लिए एजेंसी तय न होने से पार्क के गेट पर ताला लटका हुआ है। यह स्थिति तब है जब दो वर्ष पूर्व ही निर्माण कार्य पूर्ण कर इसे नगर निगम को हैंडओवर किया जा चुका है।

ग्रीन वैली से सिटी पार्क तक का सफर और बदलती जिम्मेदारी

परियोजना की शुरुआत वर्ष 2002 में ग्रीन वैली ऑफ साइलेंस के रूप में की गई थी। उस समय वन विभाग ने इसे प्राकृतिक वातावरण के बीच एक पिकनिक स्पॉट के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया था जिसकी प्रारंभिक लागत महज 83 लाख रुपए आंकी गई थी। वर्ष 2006 में जब परियोजना अधूरी रह गई तो इसे नगर निगम को हस्तांतरित कर दिया गया ताकि वहां एम्यूजमेंट पार्क बनाया जा सके। समय बीतता गया और वर्ष 2015 में नगरीय प्रशासन विभाग ने इसे अपने हाथ में लिया और इसका नाम बदलकर सिटी पार्क कर दिया। 2017 तक पूर्ण होने वाली इस योजना का निर्माण आखिरकार 2023 में जाकर पूरा हुआ लेकिन आज भी यह सुविधा जनता की पहुंच से दूर है।

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अतिक्रमण और बदलाव की भेंट चढ़ी जमीन

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मूल रूप से यह परियोजना लगभग 85 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित की गई थी। हालांकि समय के साथ शासन की उदासीनता का लाभ उठाते हुए आसपास के क्षेत्रों में अतिक्रमण हुआ और कुछ हिस्से पर छत्तीसगढ़ विज्ञान केंद्र का निर्माण कर दिया गया। वर्तमान में यह पार्क मात्र 67 एकड़ क्षेत्र में सिमट कर रह गया है। पार्क के भीतर 25 एकड़ में कृत्रिम झील और आधा किलोमीटर लंबी नहर बनाने का प्रस्ताव था जिसे नेचुरल लुक दिया जाना था। इसके साथ ही पाथ वे फूड जोन और साइकिल ट्रैक जैसी आधुनिक सुविधाएं भी कागजों में दर्ज हैं लेकिन धरातल पर इनका रखरखाव शून्य है।

करोड़ों की संरचनाएं हो रहीं जर्जर बाउंड्री टूटी और अब मवेशियों का अड्डा 

मौके पर स्थिति यह है कि संचालन की स्पष्ट नीति न होने के कारण करोड़ों की लागत से तैयार ढांचा उपयोग से पहले ही जर्जर होने लगा है। पार्क की बाउंड्रीवॉल कई जगहों से क्षतिग्रस्त हो चुकी है जिसके चलते आसपास के मवेशी परिसर में घुस रहे हैं। सुरक्षा कारणों और बिजली की समुचित व्यवस्था न होने का हवाला देते हुए पार्क को औपचारिक रूप से नहीं खोला गया है। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि जिस प्रोजेक्ट पर जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपए खर्च हुए वह विभागीय खींचतान के कारण सफेद हाथी साबित हो रहा है।

एजेंसी चयन पर अटका पेंच

विभागीय सूत्रों के अनुसार जोन कार्यालय द्वारा पार्क के संचालन का जिम्मा किसी निजी संस्था को देने के लिए दो बार मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा गया लेकिन उच्च स्तर पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है। इस संबंध में नगर निगम रायपुर के आयुक्त विश्वदीप का कहना है कि इंदिरा स्मृति वन को शुरू करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। जोन कार्यालय से प्राप्त प्रस्ताव पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद इसे जल्द ही सुचारू रूप से शुरू करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।

प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति एक नजर में

कुल स्वीकृत बजट 10 करोड़ 28 लाख रुपए था जिसमें से लगभग 8 करोड़ 28 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं। वर्तमान में विभाग के पास 2 करोड़ रुपए शेष हैं जिनका उपयोग शेष कार्यों के लिए किया जाना है। यदि जल्द ही संचालन और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई तो यह परियोजना भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगी और जनता एक बड़े मनोरंजन केंद्र से वंचित रहेगी।

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