बिना दस्तखत की सर्विस बुक, 50 के स्टांप पर नौकरी, डीईओ दफ्तर में अनुकंपा नियुक्ति पर हो गया खेल
बिलासपुर : जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें विभागीय प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर गड़बड़ी सामने आई हैं। मामला तखतपुर बीईओ कार्यालय में पदस्थ रहे स्वर्गीय ओमप्रकाश साहू के परिवार के सदस्य को दी गई नियुक्ति से जुड़ा है। आरोप है कि आवेदन पहले खारिज किए जाने के बावजूद बाद में उसी मामले में नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इस दौरान सर्विस बुक में दर्ज नामों के प्रमाणीकरण और नियुक्ति की कानूनी पात्रता को लेकर भी संदेह होने लगा हैं। मामले में सस्पेंड बाबू सुनील यादव और तत्कालीन डीईओ विजय टांडे के कार्यकाल में लिए गए निर्णयों की जांच की मांग की जा रही है।
मामला तखतपुर विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय में पदस्थ रहे चपरासी स्वर्गीय ओमप्रकाश साहू की मृत्यु के बाद उनके परिवार के सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने का है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, जिस आवेदन को विभाग ने पहले दो पत्नियों से जुड़े विवाद का हवाला देकर खारिज कर दिया था, उसी मामले की फाइल बाद में दोबारा खुली और नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया। पहले जिस आवेदन पर विभाग ने आपत्ति जताई थी, उसकी पात्रता में ऐसा क्या बदलाव आया कि बाद में नियुक्ति आदेश जारी कर दिया गया?
सर्विस बुक में नाम दर्ज, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं
बताया गया है कि स्वर्गीय ओमप्रकाश साहू की सर्विस बुक में पहली पत्नी, दूसरी पत्नी और दूसरी पत्नी के बेटे यश साहू का नाम दर्ज था, लेकिन संबंधित प्रविष्टियों पर तत्कालीन आहरण-संवितरण अधिकारी के प्रमाणीकरण या हस्ताक्षर नहीं थे। यदि सर्विस बुक की संबंधित प्रविष्टियां विधिवत प्रमाणित नहीं थीं, तो नियुक्ति प्रक्रिया में उन्हें किस आधार पर स्वीकार किया गया? क्या दस्तावेजों की वैधता की जांच की गई थी? और यदि की गई, तो उसका रिकॉर्ड कहां है? इसके जवाब पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।
2021 में आवेदन खारिज, 2025 में फिर खुली फाइल
दस्तावेजों के अनुसार, ओमप्रकाश साहू का निधन 3 जून 2020 को हुआ था। इसके बाद उनकी दूसरी पत्नी यज्ञ साहू ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया। विभाग ने 30 जून 2021 को पत्र जारी कर आवेदन खारिज कर दिया था। पत्र में पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति देने के लिए शासन के नियमों में प्रावधान नहीं होने का हवाला दिया गया था। इसके बाद वर्ष 2025 में दूसरी पत्नी के बेटे के 18 वर्ष का होने पर मामला फिर सामने आया। आरोप है कि पहले खारिज हो चुकी फाइल को दोबारा आगे बढ़ाया गया और सिरगिट्टी हायर सेकेंडरी स्कूल में चपरासी के रिक्त पद पर नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया गया।
50 रुपये के स्टांप पेपर पर सहमति, लेकिन कानूनी प्रमाणपत्र पर नहीं दिया जोर
मामले से जुड़े आरोपों के मुताबिक, दो पत्नियों और संभावित दावेदारों से संबंधित विवाद के बावजूद कानूनी वारिस होने की स्थिति स्पष्ट करने वाले दस्तावेजों पर पर्याप्त जोर नहीं दिया गया। आरोप है कि 50 रुपये के स्टांप पेपर पर तैयार नोटरी और आपसी सहमति के आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। हालांकि, अनुकंपा नियुक्ति के लिए कौन-सा प्रमाणपत्र अनिवार्य था और इस मामले में कौन-कौन से दस्तावेज नियमानुसार आवश्यक थे, इसकी जानकारी संबंधित शासन नियमों और मूल रिकॉर्ड की जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। लेकिन जब परिवार में एक से अधिक दावेदारों को लेकर विवाद सामने हो, तो पात्रता और दावेदारी की स्पष्ट जांच का महत्व और बढ़ जाता है।
जांच कमेटी ने बताई थी कानूनी राय लेने की जरूरत
शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इसमें प्राचार्य जितेंद्र खोबरागड़े, मस्तूरी बीईओ शिवराम टंडन, बिल्हा बीईओ भूपेंद्र कौशिक और बाबू गोविंद वैष्णव शामिल थे। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में दूसरी पत्नी के बेटे को अनुकंपा नियुक्ति देने के मामले में कानूनी राय लेने की जरूरत बताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के नियमों में इस संबंध में स्पष्ट प्रावधान नहीं होने के कारण कानूनी सलाह लेना जरूरी माना गया था। इसके बावजूद नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने को लेकर आरोप लगे हैं। अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि नियुक्ति से पहले किसी सक्षम विधि अधिकारी से सलाह ली गई थी या नहीं और यदि ली गई थी, तो उसका उल्लेख संबंधित फाइल में है या नहीं।
