नाबालिग बालक की ओपन लिफ्ट में फंसकर दर्दनाक मौत

बिलासपुर**: गांधी चौक स्थित विशाल इलेक्ट्रिकल्स दुकान में हुई हृदयविदारक घटना ने शहर को हिला कर रख दिया है। यहाँ पर 15 वर्षीय सुमित केंवट उर्फ छोटू की दर्दनाक मौत हो गई, जब वह दुकान की चार मंजिला ओपन लिफ्ट में फंस गया। घटना के समय सुमित प्रथम तल से सामान लेकर चौथे माले पर […]

बिलासपुर**: गांधी चौक स्थित विशाल इलेक्ट्रिकल्स दुकान में हुई हृदयविदारक घटना ने शहर को हिला कर रख दिया है। यहाँ पर 15 वर्षीय सुमित केंवट उर्फ छोटू की दर्दनाक मौत हो गई, जब वह दुकान की चार मंजिला ओपन लिफ्ट में फंस गया।

घटना के समय सुमित प्रथम तल से सामान लेकर चौथे माले पर जा रहा था। जैसे ही लिफ्ट तीसरी मंजिल पर पहुंची, सुमित का सिर लिफ्ट की दीवार में फंस गया और लिफ्ट व दीवार के बीच घिसटते हुए उसका सिर चौथी मंजिल तक रगड़ता रहा। यह दर्दनाक दृश्य सोचकर ही रूह कांप उठती है। लिफ्ट से नीचे टपकते खून ने इस हादसे की सूचना दुकान संचालक भरत हरयानी को दी।

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भरत हरयानी की दुकान में सुमित काम करता था। उसकी मां पिछले 15 सालों से हरयानी के घर में काम करती है। भरत हरयानी ने दावा किया कि सुमित उनकी दुकान में काम नहीं करता था, बल्कि कभी-कभी अपनी मां के साथ आता था। परंतु, सुमित का नियमित रूप से दुकान पर आना और काम करना इस दावे पर सवाल खड़े करता है।

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इस हादसे के बाद कोतवाली थाना प्रभारी एसआर साहू और सीएसपी पूजा कुमार मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने दुकान संचालक को नोटिस जारी कर नगर निगम से चार मंजिला दुकान और ओपन लिफ्ट लगाने के अनुमति संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही बिजली विभाग को भी लिफ्ट की सुरक्षा मानकों की जांच के लिए पत्र लिखा गया है।

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि नाबालिग बच्चों से काम करवाने की समस्या और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की एक भयावह तस्वीर है। श्रम कानूनों का उल्लंघन करते हुए नाबालिग सुमित को काम पर लगाना और ओपन लिफ्ट जैसे खतरनाक उपकरण का प्रयोग करना दोनों ही अस्वीकार्य हैं। सुमित की मां के लिए यह हादसा किसी भयानक सपने से कम नहीं, जिसने उसके बेटे को उससे छीन लिया।

सुमित के निधन के बाद, समाज में बाल श्रम और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम बच्चों के भविष्य के लिए कितने संवेदनशील हैं और उनके सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं। पुलिस और संबंधित विभागों की जांच से उम्मीद है कि इस मामले में न्याय होगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।

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