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जमीन का बड़ा फर्जीवाड़ा: असली मालिक खेत में करता रहा किसानी, इधर फर्जी आधार कार्ड से हो गई 1.88 एकड़ की रजिस्ट्री
मुंगेली जिले के सरगांव का मामला; पीड़ित किसान ने आईजी से लगाई गुहार, स्थानीय पुलिस पर निष्क्रियता और एसपी के संरक्षण का गंभीर आरोप।
मुंगेली/बिलासपुर। जमीन की जालसाजी करने वाले भू-माफियाओं के हौसले इन दिनों इतने बुलंद हैं कि वे असली मालिक की जगह किसी और को खड़ा कर पूरी की पूरी जमीन अपने नाम करवा रहे हैं। मुंगेली जिले के सरगांव थाना क्षेत्र से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक किसान अपने खेत में फसल उगाता रहा और पीछे से जालसाजों ने फर्जी आधार कार्ड और डमी व्यक्ति के जरिए उसकी 1.88 एकड़ बेशकीमती जमीन की रजिस्ट्री करा ली। मामले में पीड़ित ने स्थानीय पुलिस पर एफआईआर दर्ज न करने का आरोप लगाते हुए अब बिलासपुर संभाग के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) से न्याय की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
सरगांव तहसील के ग्राम दरूवनकांपा निवासी 41 वर्षीय किसान अरूण कुमार चेलकर (पिता सनातन चेलकर) ने अपनी शिकायत में बताया है कि पटवारी हल्का नंबर 39, ग्राम मदकू में उनकी 1.88 एकड़ कृषि भूमि (खसरा क्रमांक 345/1, 345/4, 354) स्थित है। पीड़ित के अनुसार, वह इस जमीन पर वर्तमान में भी खेती कर रहे हैं और उन्होंने यह जमीन किसी को नहीं बेची है। इसके बावजूद 14 नवंबर 2025 को गुपचुप तरीके से इस जमीन की रजिस्ट्री कुछ रसूखदार लोगों के नाम पर कर दी गई।
ऐसे खुला फर्जीवाड़े का राज
इस पूरी जालसाजी का खुलासा तब हुआ जब अतिरिक्त तहसीलदार सरगांव के न्यायालय से नामांतरण के लिए एक ईश्तहार (प्रकरण क्रमांक RD202526630241100010, दिनांक 07/01/2026) जारी किया गया। 31 जनवरी 2026 को जब यह जानकारी किसान अरूण कुमार को मिली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तत्काल तहसील कार्यालय पहुंचकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
आईजी को सौंपी गई शिकायत के अनुसार, इस पूरे षड्यंत्र को एक सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया है, जिसमें अंतरराज्यीय लोगों की संलिप्तता दिख रही है। जालसाजों ने रजिस्ट्री कार्यालय में असली अरूण कुमार की जगह किसी अन्य व्यक्ति को फर्जी आधार कार्ड के साथ खड़ा किया।
जमीन को फर्जी तरीके से बिलासपुर के निवासी कृष्ण नाथानी, रवि मोटवानी और सचिन पारवानी के नाम पर पंजीकृत किया गया है।रजिस्ट्री प्रक्रिया को असली रूप देने के लिए मध्य प्रदेश के सागर जिले से दो गवाहों— निलेश स्टैली (32) और संतोष कुमार भगत (43)— को पेश किया गया।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू स्थानीय पुलिस की भूमिका है। पीड़ित का आरोप है कि इस इतने बड़े फर्जीवाड़े के सबूत, ई-स्टाम्प की प्रति, और आरोपियों के आधार कार्ड की छायाप्रति होने के बावजूद सरगांव थाना प्रभारी ने अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। आरोप है कि थाना प्रभारी मनमानी कर रहे हैं और उन्हें मुंगेली जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) श्री भोज राम पटेल का खुला संरक्षण प्राप्त है।
पंजीयन कार्यालय की भूमिका भी संदेह के घेरे में
एक डर्मी व्यक्ति का इस्तेमाल कर और दूसरे राज्य के गवाहों के आधार पर रजिस्ट्री हो जाना पंजीयन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाता है। पीड़ित ने अपनी शिकायत में आशंका जताई है कि बिना विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव नहीं है, और इसकी भी सूक्ष्म जांच होनी चाहिए।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
