महावीर कोल वाशरी की धमकी से परेशान ग्रामीण पहुंचे पुलिस थाना,,, सामाजिक कार्यकर्ता के लिए मांगी सुरक्षा,,,, बताया दी वासियों की जमीन को फर्जी तरीके से खरीदा गया,,, नहीं खुलने देंगे कोल वाशरी

महावीर कोल वाशरी की धमकी से परेशान ग्रामीण पहुंचे पुलिस थाना,,, सामाजिक कार्यकर्ता के लिए मांगी सुरक्षा,,,, बताया दी वासियों की जमीन को फर्जी तरीके से खरीदा गया,,, नहीं खुलने देंगे कोल वाशरी बिलासपुर : लगातार शिकायत के बाद भी खरगनी और पथर्रा के ग्रामीणों की गुहार जिला प्रशासन के दरबार में नक्कारकाने में तूती […]

महावीर कोल वाशरी की धमकी से परेशान ग्रामीण पहुंचे पुलिस थाना,,, सामाजिक कार्यकर्ता के लिए मांगी सुरक्षा,,,, बताया दी वासियों की जमीन को फर्जी तरीके से खरीदा गया,,, नहीं खुलने देंगे कोल वाशरी

बिलासपुर : लगातार शिकायत के बाद भी खरगनी और पथर्रा के ग्रामीणों की गुहार जिला प्रशासन के दरबार में नक्कारकाने में तूती साबित हो रही है। नतीजन खरगहनी और पथर्रा के ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। खासकर आदिवासी जमीन के मालिक महावीर कोल वाशरी संचालकों पर डराने धमकाने का आरोप लगा रहे है। साथ ही प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप भी लगा रहे हैं। ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच राजेश साहू और सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप अग्रवाल ने बताया कि महावीर कोलवाशरी को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नही किया गया है। बावजूद इसके क्षेत्र में कोलवाशरी विस्तार की चर्चा हो रही है। यह जानते हुए भी कि क्षेत्र में कोलवाशरी है ही नहीं..तो विस्तार का सवाल ही नहीं उठता है।ग्रामीणों ने कोनी थाना पहुंचकर लिखित शिकायत कर बताया है कि सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप अग्रवाल की कोलवाशरी संचालकों की तरफ से लगातार रेकी हो रही है। यदि दिलीप के साथ किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो इसके लिए महावीर कोलवाशरी जिम्मेदार होगा।

पिछले एक महीने से खरगहनी और पथर्रा के ग्रामीणो के बीच महावीर कोलवाशरी और जिला प्रशासन के खिलाफ आक्रोश लगातार बढ़ता ही जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अपील दलील के बाद भी जिला प्रशासन ग्राम पंचायतो की शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। यद्पि ग्रामीणों को कलेक्टर ने आश्वासन दिया था कि आदिवासी क्षेत्र में बिना जनसमर्थन के उद्योग स्थापित नहीं किया जा सकता है। यदि किया जा रहा है तो मामले की जांच करेंगे। तमाम प्रमाण पेश किए जाने के बावजूद जिला प्रशासन अब तक मौन है। इसके चलते ग्रामीणों के बीच आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है।

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कोलवाशरी के खिलाफ ग्रामीणों बढ़ रहा आक्रोश

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पथर्रा और खरगनी के ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप अग्रवाल ने बताया कि महावीर कोलवाशरी के पास ना तो अनापत्ति प्रमाण पत्र है। और ना ही पेसा एक्ट क्षेत्र में कोलवाशरी खोले जाने की अनुमति ही है। बावजूद इसके क्षेत्र में कोल वाशरी विस्तार की बात कही जा रही है। जबकि क्षेत्र में कोलवाशरी है ही नहीं..तो विस्तार की बात कहां से आ गयी। दिलीप ने बताया कि ग्राम पंचायत ने पूर्व में ही सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है कि क्षेत्र में कोलवाशरी की अनुमति के लिए एनओसी नहीं दिया जाएगा। जबकि दो साल पहले भी कोलवाशरी जनसुनवाई का विरोध किया गया था। तात्कालीन समय प्रशासन की तरफ से दबाव बनवाया गया। बावजूद इसके ग्रामीणों ने महावीर कोलवाशरी की जनसुनवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया

फर्जीवाड़ा का किया खुलासा

ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में महावीर कोलवाशरी का ड्रायवर खरगनी और पथर्रा के 42 आदिवासी किसानों से 52 एकड़ जमीन खरीदा। दस्तावेज के अनुसार आदिवासियों से जमीन खरीदने वाले किसान का नाम राजेन्द्र गोंड है। सवाल उठता है कि आखिर करोड़ों रूपए एक ड्रायवर के पास आया कहां से। जाहिर सी बात है कि जैन बन्धुओं ने ही करोड़ों रूपए खर्च कर राजेन्द्र गोंड के नाम से एकड़ों जमीन खरीदा। दिलीप ने जानकारी दिया कि छानबीन के दौरान जानकारी मिली कि राजेन्द्र गोंड से सारी जमीन महावीर कोलवाशरी का संचालक अरविन्द जैन ने खरीदा..वह भी मात्र डेढ़ महीने के अन्दर। जाहिर सी बात है कि इसमें जिला प्रशासन की संदिग्ध भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है। जबकि मामले में जिला उप पंजीयक ने बताया कि उन्हें आदिवासियों से जमीन खरीदने की जानकारी नहीं है। कोटा अनुविभागीय अधिकारी ने भी ऐसे किसी मामले से अनभिज्ञता जाहिर किया है। सवाल उठता है कि आखिर आदिवासियों की जमीन को जैन बन्धुओं ने कैसे और किन अधिनियम के तहत खरीदा। और मजेदार बात है कि इसकी जानकारी ना तो कलेक्टर को है और ना ही उप पंजीयक और एसडीएम को ही है। फिर पटवारी को जानकारी होने का सवाल ही नहीं उठता है।

ईआईए रिपोर्ट में भी फर्जीवाड़ा

दिलीप ने बताया कि खरगनी और पथर्रा में कोलवाशरी खोलने के समर्थन में महावीर कोलवाशरी ने गलत जानकारी के साथ ईआईए रिपोर्ट जमा किया है। रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण जानकारियों का उल्लेख ही नहीं किया गया है। जबकि दस किलोमीटर तो दूर..बल्कि डेढ़ से दो किलोमीटर के दायरे में सरकार की बीजरोपणी, अस्पताल.जंगल, अरपा भैंसाझार स्थित डायवर्सन स्थित है। ईआईए में इसका कहीं जिक्र नहीं है। सवाल उठता है कि आखिर जिला प्रशासन को इस बात की जानकारी क्यों नहीं है। जब स्थानीय लोग इसका विरोध करते हैं तो उन्हें चुप रहने के लिए डराया धमकाया जा रहा है।

विरोध करे वालों की हो रही रेकी

एक दिन पहले यानि मंगलवार को पथर्रा और खरगनी के ग्रामीणों ने कोनी थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कोलवारी के कर्मचारी प्लान्ट का विरोध करने वालो की रेकी कर रहे है। ग्रामीणों ने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप अग्रवाल स्थानीय लोगों के हितों को लेकर लगातार सक्रिय है। जिसके चलते कोलवाशरी संचालकों की बैचैनी बढ़ गयी है। दिलीप अग्रवाल की लगातार रेकी की जा रही है। यदि दिलीप के साथ किसी प्रकार की अनहोनी होती है तो इसके लिए पुलिस प्रशासन और कोलवाशरी जिम्मेदार होगा।

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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