कवर्धा में बिजली विभाग का बड़ा घोटाला: कर्मचारी पर 50 लाख से ज्यादा गबन का आरोप, 4 महीने बाद भी FIR नहीं

कवर्धा में बिजली विभाग का बड़ा घोटाला: कर्मचारी पर 50 लाख से ज्यादा गबन का आरोप, 4 महीने बाद भी FIR नहीं

कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में बिजली विभाग से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। आरोप है कि विभाग के एक कर्मचारी ने उपभोक्ताओं से बिजली बिल के रूप में लाखों रुपये वसूले, लेकिन उस राशि को कंपनी के बैंक खाते में जमा नहीं कराया। प्रारंभिक जांच में 50 लाख रुपये से अधिक के गबन की आशंका जताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि विभाग ने इस मामले में करीब चार महीने पहले ही पुलिस को आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन अब तक मामला दर्ज नहीं हो पाया है। इससे विभागीय निगरानी व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली दोनों पर सवाल उठने लगे हैं।

कार्यालय सहायक पर गबन का आरोप
यह पूरा मामला Chhattisgarh State Power Distribution Company Limited के कवर्धा वितरण केंद्र से जुड़ा बताया जा रहा है। यहां पदस्थ कार्यालय सहायक श्रेणी-3 मनोज कुमार साहू पर गंभीर आरोप लगे हैं। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, आरोपी कर्मचारी ने 7 जुलाई 2014 से 25 जनवरी 2023 के बीच उपभोक्ताओं से बिजली बिल की राशि तो वसूली, लेकिन उसका पूरा हिसाब कंपनी के बैंक खातों में जमा नहीं कराया। जांच में सामने आया कि कई मामलों में उपभोक्ताओं से पैसा लेने के बाद भी वह बैंक रिकॉर्ड में दिखाई नहीं दे रहा था।

लेखा परीक्षण में खुला गबन का मामला
जांच के दौरान बैंक मिलान और लेखा परीक्षण में कई गंभीर वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुईं। विभागीय दस्तावेजों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2020-21 में लगभग 33 लाख 79 हजार 723 रुपये की राशि का स्पष्ट हिसाब नहीं मिल पाया, जबकि वित्तीय वर्ष 2022-23 में करीब 14 लाख 63 हजार 239 रुपये की रकम संदिग्ध पाई गई। इसके अलावा विभाग द्वारा चलाए गए विशेष वसूली अभियान के दौरान करीब 4 लाख 92 हजार 111 रुपये की राशि का भी रिकॉर्ड बैंक जमा से मेल नहीं खा सका। इन सभी आंकड़ों को जोड़ने पर प्रारंभिक जांच में 50 लाख रुपये से अधिक के संभावित गबन की आशंका जताई जा रही है, जिसे लेकर विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

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चार महीने बाद भी FIR दर्ज नहीं
मामले को लेकर विभाग के सहायक अभियंता ने Pipariya Police Station Kabirdham में लिखित आवेदन देकर आरोपी कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। विभाग ने आरोपी को निलंबित भी कर दिया है। हालांकि आवेदन दिए चार महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की है, जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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मिलीभगत की भी आशंका
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतने लंबे समय तक लाखों रुपये का गबन कैसे होता रहा और विभागीय निगरानी प्रणाली को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। वहीं पुलिस द्वारा अब तक एफआईआर दर्ज न किए जाने से मामले में कई लोगों की संभावित मिलीभगत की भी चर्चा शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन और पुलिस इस मामले में कब तक ठोस कार्रवाई करती है और गबन की पूरी सच्चाई सामने आ पाती है या नहीं।

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