पहाड़ों का सीना छलनी, मौत की सड़कें और खामोश प्रशासन, उदयपुर की पहाड़ियों का सच

पहाड़ों का सीना छलनी, मौत की सड़कें और खामोश प्रशासन, उदयपुर की पहाड़ियों का सच

उदयपुर। उदयपुर-नाथद्वारा मार्ग की पहाड़ियों में प्रशासनिक उदासीनता और भूमाफिया-तंत्र के कथित गठजोड़ ने न सिर्फ पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर खतरे में डाल दिया है, बल्कि आमजन और पर्यटकों की जान भी जोखिम में झोंक दी है। बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के बनाई गई सीमेंट और डामर की सर्पिलाकार अवैध सड़कें सरकारी भूमि को निगलती जा रही हैं और सीधे तौर पर ‘मौत का रास्ता’ साबित हो रही हैं।

राज्य सरकार की हिल पॉलिसी, झील एवं पहाड़ी संरक्षण नियम, और यहां तक कि न्यायालयी निर्देश भी जमीनी स्तर पर प्रभावहीन नजर आ रहे हैं। चीरवा घाटे से आगे सरे और सरेखुर्द गांव की पहाड़ियों में बुलडोजर से अंधाधुंध कटिंग कर मनमाने रास्ते निकाल दिए गए हैं। ये रास्ते इतने खतरनाक और संकरे हैं कि जरा-सी चूक वाहन को सैकड़ों फीट नीचे खाई में पहुंचा सकती है। चौंकाने वाली बात यह है कि ये अवैध रास्ते गूगल मैप पर दर्ज हैं, जिसके कारण बाहरी पर्यटक और सैलानी अनजाने में इन्हीं जानलेवा मार्गों से रिसोर्ट और विला तक पहुंच रहे हैं।

किसने दी स्वीकृति? जवाब किसी के पास नहीं
जब इन अवैध निर्माणों और रास्तों को लेकर जिम्मेदार विभागों से जानकारी ली गई, तो स्थिति और भी गंभीर सामने आई। अधिकांश रास्ते भूमाफियाओं ने स्वयं ही निकाल लिए, जबकि निर्माण स्वीकृतियों को लेकर जिम्मेदार अधिकारी या तो मौन हैं या जिम्मेदारी से बचते नजर आए। सूत्रों के अनुसार, बड़गांव क्षेत्र में कुछ समय के लिए तैनात रहे तत्कालीन अधिकारियों द्वारा आनन-फानन में निर्माण स्वीकृतियां जारी की गईं, जबकि कई मामलों में पंचायत स्तर पर ही नियमों को ताक पर रखकर अवैध अनुमति दी गई।

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तालाब का ‘व्यू’ बेचा, पानी का रास्ता बंद किया
भूमाफियाओं ने सरे और सरेखुर्द गांवों में विला और फार्महाउस निर्माण के साथ नई-नई प्लानिंग काट दी है। ये प्लॉट हाईवे से 300 से 400 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं, जहां से एकलिंगजी का बाघेला तालाब और आसपास के जलस्रोतों का आकर्षक दृश्य दिखाई देता है। इसी ‘व्यू’ के लालच में पहाड़ियों की बेतरतीब खुदाई की गई, जिससे कई स्थानों पर तालाबों के केचमेंट एरिया को अवरुद्ध कर दिया गया। इसका सीधा असर भविष्य में जलस्रोतों के अस्तित्व और जलापूर्ति पर पड़ सकता है।

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प्रशासन का बयान
इस पूरे मामले पर शहरी विकास प्राधिकरण (यूडीए) के अधिकारियों का कहना है कि यूडीए की पेराफेरी में ये गांव शामिल हो चुके हैं। जल्द ही मौके पर निरीक्षण कर निर्माण स्वीकृतियों और सरकारी भूमि पर बने रास्तों की जांच की जाएगी। नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह रिपोर्ट न सिर्फ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो उदयपुर की पहाड़ियां और जलस्रोत स्थायी नुकसान की ओर बढ़ सकते हैं।

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