गरीबों का राशन, आतंकियों की थाली में! 12 हजार फीट पर जैश का ठिकाना बेनकाब, मैगी–बासमती चावल का छह महीने का मिला स्टॉक

गरीबों का राशन, आतंकियों की थाली में! 12 हजार फीट पर जैश का ठिकाना बेनकाब, मैगी–बासमती चावल का छह महीने का मिला स्टॉक

जम्मू। जम्मू संभाग के पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में आतंकियों ने लंबे समय से अपने पैर पसार रखे हैं। किश्तवाड़ जिले के सिंहपोरा जंगल में सुरक्षाबलों ने एक ऐसे आतंकी ठिकाने का पर्दाफाश किया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। यह ठिकाना 12 हजार फीट की ऊंचाई पर घने जंगलों और ढलानों के बीच पत्थरों की आड़ में बनाया गया था, इतना गुप्त कि ड्रोन से भी इसकी पहचान संभव नहीं थी। रविवार को जैश-ए-मोहम्मद आतंकियों के हमले के बाद चलाए गए तलाशी अभियान में यह खुलासा हुआ। सुरक्षाबलों को यहां छह महीने का पूरा राशन स्टॉक मिला, जिससे साफ है कि आतंकी लंबे समय तक यहां ठहरने की पूरी तैयारी में थे।

मैगी से गैस सिलेंडर तक, बंकर में मिली पूरी ‘किचन’
तलाशी के दौरान आतंकी बंकर से मैगी, आटा और बासमती चावल, घी और दवाइयां, गैस सिलेंडर और बर्तन बरामद किए गए। बर्तनों में पका हुआ खाना भी मिला, जिससे संकेत मिलता है कि हमले के बाद आतंकी जल्दबाजी में खाना छोड़कर फरार हुए।

सरकारी राशन आतंकियों तक कैसे पहुंचा?
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह रहा कि ठिकाने से मिली राशन की बोरियों पर फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) और पंजाब सरकार की मुहर लगी हुई थी। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि गरीबों के लिए जारी सरकारी राशन आतंकियों तक पहुंचाया गया। यह पहली बार नहीं है, पिछले वर्ष भी इसी क्षेत्र में एक आतंकी ठिकाने से जम्मू-कश्मीर सरकार के अस्पतालों में सप्लाई होने वाली दवाएं बरामद की गई थीं। इससे स्थानीय स्तर पर सपोर्ट नेटवर्क की आशंका और मजबूत हो गई है।

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जंगलों में बसा मिनी बंकर नेटवर्क
सूत्रों के मुताबिक, किश्तवाड़ से लेकर डोडा, ऊधमपुर और कठुआ तक सक्रिय आतंकियों की कार्यप्रणाली एक जैसी है।

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  • ये आतंकी जंगलों में रहते हैं
  • अपने ठिकानों को मिनी बंकर की शक्ल देते हैं
  • किसी ग्रामीण से संपर्क करने से पहले उन्हें यह अंदाजा रहता है कि सुरक्षाबल कितनी देर में मौके पर पहुंच सकते हैं

इससे आतंकियों को हर मूवमेंट की पहले से जानकारी मिल जाती है।

मुठभेड़ में जवान बलिदान, 7 घायल
रविवार को हुए हमले और बाद की मुठभेड़ में एक जवान वीरगति को प्राप्त हुआ, जबकि सात अन्य जवान घायल हुए हैं। वर्ष 2026 में यह आतंकी हिंसा में शहीद होने वाले पहले जवान हैं।

ऑपरेशन ‘त्राशी’ जारी
सुरक्षाबलों ने इलाके में ऑपरेशन त्राशी तेज कर दिया है। आशंका जताई जा रही है कि आसपास के जंगलों में आतंकियों के और भी ठिकाने मौजूद हो सकते हैं। सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरे क्षेत्र को खंगाल रही हैं।

बड़ा सवाल
जब जंगलों की ऊंचाई पर छिपे आतंकियों तक सरकारी राशन पहुंच सकता है, तो सप्लाई चेन में सेंध किस स्तर पर लगी? यही सवाल अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा चुनौती बना हुआ है।

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