तेलंगाना में इंसानियत शर्मसार: एम्बुलेंस नहीं मिली, कंधों पर शव उठाकर 4 किमी पैदल चला परिवार

तेलंगाना में इंसानियत शर्मसार: एम्बुलेंस नहीं मिली, कंधों पर शव उठाकर 4 किमी पैदल चला परिवार

भद्राचलम। तेलंगाना के भद्राचलम से स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर देने वाली एक बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। यहां एक परिवार को अस्पताल से एम्बुलेंस नहीं मिलने पर अपने रिश्तेदार के शव को कंधों पर उठाकर कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।

जानकारी के मुताबिक भद्राचलम निवासी 45 वर्षीय कंडी वेंकन्ना को तेज गर्मी और लू लगने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई, लेकिन मौत के बाद परिवार को शव घर ले जाने के लिए कोई एम्बुलेंस या शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। घंटों इंतजार के बाद भी मदद नहीं मिलने पर परिजन और गांव के कुछ लोग शव को कंधे पर रखकर करीब चार किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर हो गए।

इस पूरी घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। यूजर्स ने इसे “व्यवस्था की असफलता” और “गरीबों के साथ अमानवीय व्यवहार” करार दिया है। बढ़ते विवाद के बाद जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने मामले का संज्ञान लेते हुए शुरुआती जांच के आदेश जारी किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि शव वाहन समय पर उपलब्ध क्यों नहीं कराया गया।

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घटना ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्षी दल BRS ने कांग्रेस सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं को बदहाल करने का आरोप लगाया है। BRS के कार्यकारी अध्यक्ष K. T. Rama Rao ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि राज्य में गरीबों की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है और अंतिम यात्रा जैसी संवेदनशील स्थिति में भी लोगों को सम्मान नहीं मिल पा रहा। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यकाल की शव वाहन सेवाओं का जिक्र करते हुए मौजूदा सरकार को कठघरे में खड़ा किया।

वहीं BRS नेता ने भी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं। इस घटना ने न सिर्फ सरकारी अस्पतालों की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में आपातकालीन सेवाओं की वास्तविक स्थिति को भी उजागर कर दिया है। अब लोग मांग कर रहे हैं कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

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