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जिनेवा में भारतीय दूतावास घोटाला: CBI ने 2 करोड़ की फंड हेराफेरी मामले की शुरू की जांच
नई दिल्ली। सीबीआई ने जिनेवा स्थित भारतीय स्थायी मिशन में तैनात एक पूर्व लेखा अधिकारी मोहित पर लगभग दो करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के आरोप में जांच शुरू की है। आरोप है कि मोहित ने यह राशि अपने क्रिप्टो-गैम्बलिंग कारोबार के लिए अपने निजी खाते में ट्रांसफर की।
भुगतान प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी
मोहित को दूतावास में यूनियन बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड (यूबीएस) में भुगतान निर्देश जमा करने की जिम्मेदारी दी गई थी। दूतावास वेंडरों को उनके इनवॉइस के आधार पर भुगतान करता था, जिनमें क्यूआर कोड और भुगतान पर्चियां शामिल होती थीं। जांच में पता चला कि मोहित ने कुछ वेंडरों के क्यूआर कोड को अपने बनाए फर्जी कोड से बदल दिया, जिससे पैसा सीधे उसके निजी खाते में चला गया।
फंड डायवर्जन की चालाकी
मोहित ने मासिक बैंक स्टेटमेंट में भी अपना नाम बदलकर वेंडर का नाम दिखाया, जिससे यह लगे कि भुगतान सही तरीके से हुआ। इस तरीके से उसने लगभग दो करोड़ रुपये की रकम अपने निजी उपयोग के लिए डायवर्ट की।
CBI ने शुरू की जांच
CBI मामले की गंभीरता को देखते हुए डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच से यह पता चलेगा कि हेराफेरी कितने समय से चल रही थी और इसमें किसी और का हाथ था या नहीं।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
