भरत तिवारी एनकाउंटर पर गहराया विवाद! हाईकोर्ट पहुंचा मामला, पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

भरत तिवारी एनकाउंटर पर गहराया विवाद! हाईकोर्ट पहुंचा मामला, पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

भोजपुर: भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र में भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत का मामला अब कानूनी और राजनीतिक बहस का विषय बनता जा रहा है। घटना की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि जिस युवक का वीडियो पहले से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था, उसे गिरफ्तार करने के बजाय हालात मुठभेड़ तक कैसे पहुंच गए।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि पूरे घटनाक्रम में कई ऐसे तथ्य हैं जो पुलिस की कार्रवाई पर संदेह पैदा करते हैं। दावा किया गया है कि यदि पुलिस के पास पहले से पर्याप्त जानकारी थी तो समय रहते कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यही सवाल अब इस मामले को एक साधारण पुलिस कार्रवाई से आगे बढ़ाकर जवाबदेही और पारदर्शिता की बहस में बदल रहा है।

मामले ने और तूल तब पकड़ लिया जब मृतक पक्ष की ओर से निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई गई। याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति ने आत्मसमर्पण किया था और उसे गिरफ्तार किया जा सकता था, तो फिर जानलेवा कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ी ? हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

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दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई थी और भरत तिवारी की ओर से फायरिंग की गई थी। लेकिन घटना के बाद कई पुलिसकर्मियों और थाना प्रभारी को निलंबित किया जाना इस मामले को और संवेदनशील बना रहा है। इससे यह धारणा भी मजबूत हुई है कि शुरुआती जांच में कुछ गंभीर प्रश्न सामने आए हैं, जिनका जवाब अभी बाकी है।

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अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट और प्रस्तावित स्वतंत्र जांच पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह वास्तव में एक वैध पुलिस मुठभेड़ थी या फिर इसके पीछे कोई ऐसी सच्चाई छिपी है, जिसे सामने लाने की जरूरत है। जब तक निष्पक्ष जांच पूरी नहीं होती, तब तक यह मामला पुलिस कार्रवाई और न्यायिक जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़े करता रहेगा।

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