रायपुर की कन्या शाला में बदहाली का आलम: जर्जर छत, टूटती दीवारें और जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर छात्राएं

रायपुर की कन्या शाला में बदहाली का आलम: जर्जर छत, टूटती दीवारें और जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर छात्राएं
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रायपुर। राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती क्षेत्र स्थित शासकीय सरस्वती कन्या पूर्व माध्यमिक शाला एवं नवीन सरस्वती कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला की तस्वीरें सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। बाहर से सामान्य नजर आने वाला यह स्कूल भवन अंदर से जर्जर और असुरक्षित स्थिति में पहुंच चुका है। कहीं छत का प्लास्टर भरभराकर गिर रहा है, तो कहीं दीवारों में सीपेज और दरारें दिखाई दे रही हैं। कई कमरों को सुरक्षा के लिहाज से बंद कर दिया गया है और छात्राओं को वैकल्पिक कमरों व हॉल में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।

स्कूल में प्राथमिक से लेकर हाई और हायर सेकेंडरी स्तर तक की कक्षाएं संचालित होती हैं। यानी बड़ी संख्या में छात्राएं रोजाना इसी परिसर में पढ़ने पहुंचती हैं। ऐसे में भवन की मौजूदा स्थिति सिर्फ बुनियादी सुविधाओं की कमी का मामला नहीं है, बल्कि छात्राओं और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।Screenshot 2026-08-13 135635

शौचालय पर ताला, नल बंद और व्यवस्था बदहाल
स्कूल परिसर में पहुंचने पर सबसे पहले जिन समस्याओं पर नजर जाती है, उनमें शौचालय और पानी की व्यवस्था शामिल है। छात्राओं के लिए बने शौचालय में ताला लगा हुआ दिखाई देता है। नल बंद हैं और वॉश एरिया की स्थिति भी बेहद खराब है। दीवारों और आसपास के हिस्सों में टूट-फूट साफ दिखाई देती है। बालिका विद्यालय होने के कारण स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय की सुविधा बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। लेकिन यहां की स्थिति देखकर सवाल उठता है कि छात्राओं को रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाएं किस तरह मिल रही हैं।Screenshot 2026-08-13 135834

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कई कक्षाएं हो चुकी हैं असुरक्षित
स्कूल के कई कमरों की छत और दीवारों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। कुछ कक्षाओं में छत से प्लास्टर और मलबा गिर चुका है। दीवारों पर सीपेज के निशान दिखाई देते हैं और कई जगहों पर निर्माण सामग्री कमजोर होकर उखड़ रही है। सुरक्षा के लिहाज से कुछ कक्षाओं को बंद कर दिया गया है। कमरों के सामने टेबल आदि लगाकर अस्थायी बैरिकेडिंग की गई है, ताकि छात्राएं और अन्य लोग उन हिस्सों में प्रवेश न कर सकें जहां हादसे की आशंका है। शिक्षकों के मुताबिक, स्कूल में लगातार ऐसे कमरे सामने आ रहे हैं जिन्हें सुरक्षा कारणों से बंद करना पड़ रहा है। एक कमरे से दूसरे कमरे में कक्षाओं को शिफ्ट करने के बावजूद कुछ समय बाद वहां भी छत या दीवारों की समस्या सामने आ जाती है।8a4fedee-c6b1-4e1f-b267-3232cc0b0512

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जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर छात्राएं
जर्जर भवन का सीधा असर छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कुछ छात्राओं को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। छात्राओं ने बताया कि यह स्थिति उनके लिए असुविधाजनक होने के साथ-साथ डर पैदा करने वाली भी है। एक छात्रा ने बताया कि वे पहले दूसरे कक्ष में बैठती थीं, लेकिन वहां मलबा गिरने और भवन की स्थिति खराब होने के बाद उन्हें दूसरे स्थान पर शिफ्ट किया गया। छात्राओं के मुताबिक, अब उन्हें अलग-अलग सुरक्षित समझे जाने वाले स्थानों पर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। छात्राओं से जब पूछा गया कि क्या उन्हें डर लगता है कि कहीं छत या मलबा उनके ऊपर न गिर जाए, तो उन्होंने डर की बात स्वीकार की। उनका कहना था कि अभी तक किसी छात्रा को मलबा गिरने से चोट नहीं लगी है, लेकिन इस बात का डर बना रहता है कि अगर अचानक कुछ गिर गया तो बड़ा हादसा हो सकता है।

"रात में मलबा गिरता है, सुबह स्कूल आते हैं तो पता चलता है"
छात्राओं के अनुसार, कई बार छत से मलबा रात के समय गिर जाता है और सुबह स्कूल पहुंचने पर इसकी जानकारी मिलती है। यही वजह है कि उन्हें हर समय इस बात की चिंता रहती है कि कहीं कक्षा के दौरान ही कोई हिस्सा न गिर जाए। एक छात्रा ने बताया कि अभी टेस्ट के दौरान उन्हें वैकल्पिक कक्षा में बैठना पड़ रहा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भवन की स्थिति का असर नियमित पढ़ाई के साथ-साथ परीक्षा और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है।Screenshot 2026-08-13 140008

प्रधानाचार्य कक्ष भी सुरक्षित नहीं
स्कूल की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानाचार्य कक्ष भी जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। कमरे की छत का प्लास्टर कई जगह से गिर चुका है। ऊपर लोहे की सरिया दिखाई दे रही है और फर्श पर मलबा पड़ा हुआ है। जिस कमरे में स्कूल की प्रशासनिक व्यवस्था संभालने वाले प्रधानाचार्य बैठते हैं, अगर वही कमरा असुरक्षित हो जाए तो भवन की समग्र स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्कूल के अन्य हिस्सों में भी दीवारों पर सीपेज और टूट-फूट दिखाई देती है। बारिश के मौसम में समस्या और बढ़ने की बात सामने आई है।

शिक्षक कक्ष में भी गिरा मलबा
स्कूल के शिक्षक कक्ष की तस्वीर भी चिंता बढ़ाने वाली है। यहां हाल ही में छत से मलबा गिरने की घटना सामने आई। शिक्षकों के मुताबिक, जिस स्थान पर स्टाफ बैठकर काम करता है, वहां से बड़े हिस्से में निर्माण सामग्री नीचे गिर गई। गनीमत रही कि जिस समय मलबा गिरा, वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। लेकिन इस घटना ने शिक्षकों के बीच भी डर पैदा कर दिया है। एक शिक्षक ने बताया कि स्कूल के अलग-अलग हिस्से समय के साथ कमजोर होते गए हैं। पहले कंप्यूटर रूम के स्लैब का हिस्सा गिरने की घटना हुई थी। इसके बाद प्रधानाचार्य कक्ष समेत अन्य हिस्सों को भी धीरे-धीरे बंद करना पड़ा। अब शिक्षक और छात्र सुरक्षित जगह तलाशते हुए लगातार कमरों को बदलने के लिए मजबूर हैं।Screenshot 2026-08-13 140021

करीब छह दशक पुराना बताया जा रहा है स्कूल भवन
स्कूल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि भवन करीब 60 से 65 वर्ष पुराना है। यहां प्राथमिक, मिडिल, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर की कक्षाएं संचालित होती हैं। शिक्षकों के मुताबिक, यह क्षेत्र का छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण और लंबे समय से संचालित स्कूल है। यहां छात्राओं की संख्या भी अच्छी है। ऐसे में पुराने भवन की मरम्मत अथवा नए भवन की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। लेकिन मौजूदा समय में समस्या सिर्फ भवन के पुराने होने तक सीमित नहीं है। भवन के अलग-अलग हिस्सों में छत, प्लास्टर, दीवार और सीपेज की समस्या के चलते स्कूल प्रबंधन को लगातार वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है।

2014 से सामने आ रही भवन की समस्याएं
स्कूल प्रबंधन के अनुसार, भवन की खराब स्थिति कोई नई समस्या नहीं है। शिक्षकों ने बताया कि वर्ष 2014 के आसपास भी स्कूल के कंप्यूटर रूम के स्लैब का बड़ा हिस्सा गिरा था। इसके बाद समय-समय पर भवन के अलग-अलग हिस्सों में नुकसान होता रहा। पिछले कुछ वर्षों में प्रधानाचार्य कक्ष और अन्य कमरों की स्थिति भी खराब हुई। अब शिक्षक कक्ष और दूसरे हिस्सों में भी मलबा गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। शिक्षकों का कहना है कि वे अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं, लेकिन सबसे बड़ी चिंता छात्राओं की सुरक्षा है। छोटे बच्चे परिसर में आते-जाते हैं और कई बार स्कूल परिसर में खेलते भी हैं। ऐसे में किसी कमजोर हिस्से से अचानक मलबा गिरने की स्थिति में गंभीर दुर्घटना हो सकती है।

शिकायत के बाद अधिकारी पहुंचे, नए भवन की उम्मीद अधूरी
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि भवन की स्थिति को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों को लिखित रूप से जानकारी दी गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधि और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भी शिकायत दी गई थी। शिक्षकों के अनुसार, अधिकारियों ने स्कूल का निरीक्षण भी किया था और नए भवन से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद बनी थी। स्कूल प्रबंधन को उम्मीद थी कि नए शैक्षणिक सत्र में उन्हें बेहतर भवन मिल सकेगा, लेकिन फिलहाल वह उम्मीद पूरी होती नजर नहीं आ रही है। अब स्कूल प्रबंधन यह जानना चाहता है कि प्रस्ताव या फाइल किस स्तर पर लंबित है और नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया कब शुरू होगी।

50 से अधिक छात्राओं वाली कक्षाओं के लिए अस्थायी इंतजाम
शिक्षकों ने बताया कि कक्षा 9वीं और 10वीं में छात्राओं की संख्या 50 से अधिक है। ऐसे में जर्जर कक्षाओं को बंद करने के बाद सभी छात्राओं को सुरक्षित स्थान पर बैठाना बड़ी चुनौती बन गया है। कुछ कक्षाओं को हॉल में शिफ्ट किया गया है। जहां भवन का कोई हिस्सा अपेक्षाकृत सुरक्षित दिखाई देता है, वहीं कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। शिक्षकों का कहना है कि छात्राओं को लगातार सतर्क रहने के लिए कहा जाता है और ऐसी जगहों पर बैठाया जाता है जहां दरार या सीपेज की समस्या कम हो। लेकिन यह व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं है।Screenshot 2026-08-13 135721

बारिश बढ़ते ही बढ़ जाती है चिंता
मानसून के दौरान स्कूल भवन की समस्या और गंभीर होने की बात सामने आई है। दीवारों में सीपेज के कारण नमी बढ़ रही है। कुछ हिस्सों में पानी का असर साफ दिखाई देता है। स्कूल प्रबंधन की चिंता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि लगातार बारिश के बीच पहले से कमजोर छत और दीवारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे में भवन के किसी हिस्से के अचानक गिरने का खतरा बना रहता है। शिक्षकों ने यह भी बताया कि कुछ हिस्सों में बारिश के दौरान बिजली के करंट को लेकर भी चिंता रहती है। यदि पानी और विद्युत व्यवस्था का संपर्क होता है तो स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो सकती है।

मतदान केंद्र के तौर पर इस्तेमाल होता है परिसर
दिलचस्प बात यह है कि इसी स्कूल परिसर का इस्तेमाल निर्वाचन के दौरान मतदान केंद्र के रूप में भी किया जाता है। स्कूल में चुनाव से संबंधित बोर्ड और व्यवस्थाएं दिखाई देती हैं। चुनाव के समय इसी परिसर में बड़ी संख्या में मतदाता पहुंचते हैं और अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि जब किसी सरकारी भवन का इस्तेमाल सार्वजनिक और महत्वपूर्ण प्रशासनिक गतिविधियों के लिए किया जाता है, तो उसकी सुरक्षा और आधारभूत संरचना की स्थिति को लेकर नियमित रूप से गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जाती? हालांकि चुनाव के दौरान व्यवस्थाएं अलग तरीके से की जाती हैं, लेकिन स्कूल भवन की स्थायी स्थिति में सुधार की जरूरत अपनी जगह बनी हुई है।

आखिर जिम्मेदार कौन?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने पुराने और जर्जर भवन की स्थिति सुधारने में अब तक देरी क्यों हुई? सरकार और प्रशासन की ओर से सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, भवन सुधार और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात लगातार कही जाती है। लेकिन जब राजधानी के बीचोंबीच एक बालिका विद्यालय में छात्राओं को जर्जर कमरों से निकालकर हॉल और दूसरे कमरों में शिफ्ट करना पड़े, जमीन पर बैठकर पढ़ना पड़े और शिक्षक खुद छत से मलबा गिरने के डर में काम करें, तो व्यवस्था के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर साफ दिखाई देता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी तक किसी छात्रा के मलबा गिरने से घायल होने की घटना सामने नहीं आई है। लेकिन क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाए? यही सवाल इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है।Screenshot 2026-08-13 135919

क्या हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?
स्कूल प्रबंधन पहले ही शिकायत कर चुका है। अधिकारी निरीक्षण कर चुके हैं। जर्जर कमरों को बंद किया जा चुका है। छात्राओं को दूसरी जगह शिफ्ट किया जा चुका है। शिक्षक भी असुरक्षित कमरों से बचने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद यदि स्थायी समाधान के तौर पर नए भवन या व्यापक मरम्मत की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। सरकारी स्कूल सिर्फ एक इमारत नहीं होता। यह उन बच्चों के भविष्य की नींव होता है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा के जरिए आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। 

खासकर बालिका विद्यालय में सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। रायपुर के इस स्कूल की तस्वीरें अब यही सवाल पूछ रही हैं, क्या छात्राओं की सुरक्षा के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा, या प्रशासन समय रहते इस जर्जर भवन को लेकर ठोस कदम उठाएगा? फिलहाल, छात्राएं डर के बीच पढ़ाई कर रही हैं, शिक्षक असुरक्षित कमरों से बचते हुए कक्षाएं संचालित कर रहे हैं और स्कूल प्रबंधन नए भवन की उम्मीद लगाए बैठा है। अब निगाहें जिम्मेदार विभाग और प्रशासन पर हैं कि इस मामले में कार्रवाई कब होती है।

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