जेल में श्रवण की मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पुलिस जांच पर सवाल
बिलासपुर : बिलासपुर सेंट्रल जेल में 34 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी की संदिग्ध मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है । मामले में शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से हिरासत में हुई मौत की जांच, एफआईआर और अब तक की आपराधिक कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा है । इससे पहले बिलासपुर हाई कोर्ट भी मामले में राज्य की जवाबदेही तय करते हुए मृतक के परिवार को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दे चुका है ।
शराब के मामले में गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी तबीयत
मामला 18 जनवरी 2024 का है । सीपत थाना पुलिस ने ग्राम मोहड़ा निवासी श्रवण सूर्यवंशी को कथित रूप से कच्ची महुआ शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था । पुलिस ने उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत अपराध दर्ज किया और उसे बिलासपुर केंद्रीय जेल भेज दिया । न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार उसके पास करीब छह लीटर कच्ची महुआ शराब बरामद होने का उल्लेख है । 21 जनवरी को जेल में उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद उसे बिलासपुर स्थित सिम्स अस्पताल ले जाया गया । इलाज के दौरान 22 जनवरी की सुबह उसकी मौत हो गई । इसके बाद मामले में न्यायिक जांच शुरू की गई ।
न्यायिक जांच में सिर की चोट का जिक्र
मृत्यु के बाद कराई गई न्यायिक जांच में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की रिपोर्ट में मौत को सिर में लगी चोट से उत्पन्न जटिलताओं से जोड़कर देखा गया । रिपोर्ट के इस निष्कर्ष ने मामले को गंभीर बना दिया और हिरासत के दौरान चोट लगने के आरोपों पर सवाल खड़े हुए । राज्य की ओर से अदालत में यह पक्ष रखा गया था कि गिरफ्तारी के समय श्रवण की चिकित्सकीय जांच की गई थी और उस समय कोई बाहरी चोट नहीं मिली थी । हालांकि, बाद की न्यायिक जांच में सिर की चोट का उल्लेख सामने आया ।
परिवार ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
श्रवण की मौत के बाद उसकी पत्नी और नाबालिग बेटियों ने न्याय के लिए हाई कोर्ट का रुख किया । परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और मुआवजे की मांग की । अक्टूबर 2024 में बिलासपुर हाई कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को परिवार को एक लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया । अदालत ने यह भी कहा कि राज्य के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है ।
अब सुप्रीम कोर्ट की निगाह जांच पर
हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी परिवार की ओर से मामले को आगे सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया । हालिया सुनवाई में शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि हिरासत में हुई मौत के मामले में एफआईआर और आपराधिक जांच को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गई है । डीजीपी और गृह सचिव को भी अदालत के समक्ष सरकार का पक्ष रखने के लिए कहा गया ।
सवाल सिर्फ मुआवजे का नहीं, जवाबदेही का भी
श्रवण सूर्यवंशी की मौत ने पुलिस और जेल प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं । परिवार का कहना है कि उन्हें केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि मौत के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई चाहिए ।
अब पूरे मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है और हिरासत में श्रवण को लगी चोट की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं । सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है ।
