जेल में Prajwal Revanna के पास मिला मोबाइल, 90 से ज्यादा अश्लील वीडियो का दावा; CCB खंगाल रही डिजिटल राज
बेंगलुरु। कर्नाटक की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में बंद पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। जेल परिसर में केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) की छापेमारी के दौरान एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद हुआ है। अब इस फोन की डिजिटल जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में फोन से 90 से ज्यादा अश्लील वीडियो मिलने का दावा किया गया है। पुलिस और जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फोन जेल के अंदर किस तरह पहुंचा और उसमें मौजूद वीडियो कब तथा किस माध्यम से सेव किए गए।
पांच घंटे चली कार्रवाई, कई मोबाइल मिले
बताया जा रहा है कि CCB की टीम ने मंगलवार को परप्पना अग्रहारा जेल में करीब पांच घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान जेल परिसर से कई मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद किए गए। प्रज्वल रेवन्ना के पास से मिले एंड्रॉयड फोन को जांच के लिए सुरक्षित किया गया है। एजेंसी अब फोन में मौजूद कॉल रिकॉर्ड, मैसेज, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य डिजिटल फाइलों की पड़ताल कर रही है।
वीडियो फोन में पहले से थे या जेल में डाउनलोड हुए?
जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि फोन में मिले वीडियो आखिर आए कहां से? एजेंसी इस संभावना की जांच कर रही है कि ये फाइलें जेल के भीतर इंटरनेट के जरिए डाउनलोड की गईं या मोबाइल में पहले से मौजूद थीं। पेन ड्राइव अथवा किसी दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए डेटा ट्रांसफर किए जाने की संभावना को भी जांच के दायरे में रखा गया है। फोरेंसिक जांच से मोबाइल के इस्तेमाल और डेटा ट्रांसफर का पूरा क्रम सामने आने की उम्मीद है।
जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
हाई-प्रोफाइल कैदी के पास मोबाइल फोन पहुंचने के बाद जेल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। आखिर प्रतिबंधित मोबाइल जेल के अंदर कैसे पहुंचा और इतने समय तक इसकी जानकारी अधिकारियों को क्यों नहीं हुई, इसकी भी जांच की जा रही है। मामले के बाद जेल स्टाफ पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। ड्यूटी में लापरवाही के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।
प्रज्वल रेवन्ना पहले से गंभीर मामले में सजा काट रहे
प्रज्वल रेवन्ना पहले से ही गंभीर यौन अपराध के मामले में जेल में बंद हैं। वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान उनसे जुड़े कई आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद कर्नाटक में राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हुआ था। इसके बाद मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया गया था। बाद में अदालत की कार्यवाही में उन्हें यौन अपराध से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
अब मोबाइल की फोरेंसिक रिपोर्ट खोलेगी पूरा राज
जांच एजेंसी फिलहाल मोबाइल फोन और उससे जुड़े डिजिटल डेटा को खंगाल रही है। जांचकर्ताओं की नजर इस बात पर भी है कि क्या फोन से जेल के अंदर किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क किया गया था या डिजिटल गतिविधियों को अंजाम दिया गया। मोबाइल की फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि कथित वीडियो कब और कैसे फोन में पहुंचे और जेल के भीतर मोबाइल इस्तेमाल की पूरी कहानी क्या है।
