बकरीद से पहले मुंबई में हाई वोल्टेज ड्रामा! सोसाइटी में बकरियों को लेकर बढ़ा तनाव, भारी पुलिस तैनात
मुंबई: मुंबई के मीरा रोड इलाके में बकरीद से पहले सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब एक हाउसिंग सोसाइटी परिसर में बड़ी संख्या में बकरियां लाए जाने का स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया है। पूनम क्लस्टर हाउसिंग सोसाइटी में बकरियों को रखने को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते प्रदर्शन और नारेबाजी तक पहुंच गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया और इलाके में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
स्थानीय निवासियों का कहना था कि कुर्बानी और उससे जुड़ी गतिविधियां केवल प्रशासन द्वारा तय स्थानों पर ही होनी चाहिए, न कि रिहायशी परिसरों में। विरोध के बीच मीरा-भायंदर नगर निगम (MBMC) ने कार्रवाई करते हुए सोसाइटी परिसर से लगभग 40 से 50 बकरियों को हटाकर नगर निगम द्वारा निर्धारित स्थान पर पहुंचाया। इस दौरान पुलिस और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।
तनाव उस समय और बढ़ गया जब कुछ लोगों ने विरोध स्वरूप सोसाइटी के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। भाजपा नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं का पालन तय नियमों और निर्धारित स्थानों पर ही होना चाहिए। स्थानीय भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने भी कहा कि किसी भी समुदाय को त्योहार मनाने का अधिकार है, लेकिन इससे दूसरे लोगों को असुविधा नहीं होनी चाहिए।
इस पूरे विवाद में मंगलवार को नया मोड़ तब आया जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर विरोध के प्रतीक के रूप में एक सूअर के बच्चे को परिसर में लाने की कोशिश की। मौके से सामने आए वीडियो में एक पुलिस अधिकारी को उस सूअर के बच्चे को उठाकर तेजी से हटाते हुए देखा गया। इस घटना ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया। प्रदर्शनकारियों ने इसे ‘वराह पूजा’ से जोड़ने की बात कही, हालांकि प्रशासन ने स्थिति को तुरंत नियंत्रित कर लिया।
बकरीद को देखते हुए अब मीरा रोड और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और भड़काऊ संदेशों पर भी नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। वहीं इस घटना ने एक बार फिर महानगरों की हाउसिंग सोसाइटियों में धार्मिक गतिविधियों और सामुदायिक संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
