वायनाड टनल हादसे से पहले खतरे का अलर्ट! इंजीनियरों की रिपोर्ट में दर्ज थी चेतावनी, अब उठ रहे कई बड़े सवाल

वायनाड टनल हादसे से पहले खतरे का अलर्ट! इंजीनियरों की रिपोर्ट में दर्ज थी चेतावनी, अब उठ रहे कई बड़े सवाल

तिरुवनंतपुरम। केरल के वायनाड जिले में मेप्पाडी-कल्लाडी टनल रोड परियोजना के निर्माण स्थल पर हुए भीषण भूस्खलन ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य मजदूर घायल हुए। अब इस दुर्घटना को लेकर सामने आई एक आंतरिक तकनीकी रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सुरंग के उत्तरी प्रवेश द्वार के ऊपर स्थित पहाड़ी की अस्थिर स्थिति को लेकर इंजीनियरों ने पहले ही संभावित खतरे की चेतावनी दी थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनी की आंतरिक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि लगातार बारिश और मिट्टी के भीतर बढ़ते जलभराव के कारण ढलान किसी भी समय ध्वस्त हो सकती है। रिपोर्ट में इस क्षेत्र को अत्यधिक संवेदनशील बताते हुए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने की आवश्यकता भी जताई गई थी।

रिपोर्ट में जताई गई थी भूस्खलन की आशंका
बताया जा रहा है कि यह तकनीकी रिपोर्ट निर्माण कार्य में शामिल उप-ठेकेदार कंपनी से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई थी। रिपोर्ट तैयार करने वाली टीम में वरिष्ठ भूवैज्ञानिक, भू-सर्वेक्षण विशेषज्ञ और परियोजना के तकनीकी सलाहकार शामिल थे। निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने पाया कि सुरंग के प्रवेश द्वार के ऊपर लगभग 35 मीटर मोटी ढीली गादयुक्त मिट्टी की परत मौजूद थी, जिसके नीचे कठोर चट्टान थी। विशेषज्ञों का मानना था कि इस प्रकार की भू-संरचना भारी वर्षा के दौरान अत्यधिक जोखिम पैदा करती है, क्योंकि पानी मिट्टी के भीतर जमा होकर उसकी स्थिरता कमजोर कर देता है।

दरारें, रिसाव और मिट्टी खिसकने के मिले संकेत
रिपोर्ट के अनुसार निरीक्षण के दौरान ढलान पर कई जगह चौड़ी होती दरारें दिखाई दीं। इसके अलावा मिट्टी लगातार खिसकती हुई नजर आई और कई स्थानों पर कीचड़ मिला पानी बाहर रिसता देखा गया। विशेषज्ञों ने यह भी दर्ज किया कि मिट्टी के भीतर छोटे-छोटे खोखले हिस्से (कैविटी) बनने लगे थे। ऐसे संकेत आमतौर पर इस बात की ओर इशारा करते हैं कि ढलान के भीतर का ढांचा कमजोर हो रहा है और किसी भी समय बड़े स्तर पर धंसाव या भूस्खलन हो सकता है।wayanad pti

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भूमिगत जल प्रवाह बना सबसे बड़ा खतरा
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भूमिगत जल प्रवाह से जुड़ा बताया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने ढलान के भीतर बहते पानी की आवाज सुनने का दावा किया था। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि लगातार बारिश के कारण पानी ने मिट्टी के भीतर अपना रास्ता बना लिया था। इससे मिट्टी अंदर ही अंदर कटाव का शिकार हो रही थी। बाहर से पहाड़ी सामान्य दिखाई दे रही थी, लेकिन भीतर उसकी मजबूती लगातार कम होती जा रही थी। विशेषज्ञों ने इसे संभावित बड़े भूस्खलन का संकेत माना था।

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सुरक्षा के लिए किए गए थे कुछ उपाय, लेकिन...
रिपोर्ट के अनुसार निर्माण एजेंसी ने ढलान को स्थिर रखने के लिए कई इंजीनियरिंग उपाय अपनाए थे। इनमें ढलान को सीढ़ीनुमा आकार देना, शॉटक्रेट (कंक्रीट की परत) का छिड़काव करना और सॉइल नेल्स के माध्यम से मिट्टी को मजबूती देने का प्रयास शामिल था। हालांकि निरीक्षण के दौरान ही इन उपायों के बावजूद मिट्टी खिसकने के संकेत मिलने लगे थे। विशेषज्ञों का मानना था कि लगातार वर्षा की स्थिति में ये उपाय पर्याप्त साबित नहीं हो सकते।wayanad ani

रिपोर्ट में सुरक्षा तंत्र पर भी सवाल
तकनीकी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि परियोजना के एक हिस्से में जल निकासी व्यवस्था प्रभावी नहीं थी। कुछ स्थानों पर पानी निकालने वाले छिद्र अपेक्षित रूप से कार्य नहीं कर रहे थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ढलान की वास्तविक स्थिति पर नजर रखने के लिए आवश्यक कुछ निगरानी उपकरण उपलब्ध नहीं थे। विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि केवल दृश्य निरीक्षण के आधार पर ढलान की आंतरिक स्थिति का सही आकलन करना कठिन होगा।

रेलवे इंजीनियरों का पक्ष भी आया सामनेदूसरी ओर, परियोजना से जुड़े कोंकण रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक सावधानियां बरती गई थीं और कुछ समय के लिए कार्य भी रोका गया था। उनका दावा है कि उपलब्ध सुरक्षा मानकों के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए गए थे। अधिकारियों का यह भी कहना है कि अत्यधिक वर्षा के कारण ऊपर से आया विशाल भूस्खलन असाधारण प्रकृति का था और उसे पूरी तरह रोक पाना आसान नहीं था।wayanad pti (2)

अब जांच में उठेंगे कई सवाल
हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संभावित खतरे के संकेत पहले से मौजूद थे, तो क्या अतिरिक्त सुरक्षा उपाय पर्याप्त थे? क्या निगरानी प्रणाली और मजबूत की जा सकती थी? क्या निर्माण क्षेत्र में जोखिम का आकलन सही तरीके से किया गया था? इन सभी पहलुओं की जांच अब संबंधित एजेंसियां कर रही हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दुर्घटना केवल प्राकृतिक कारणों से हुई या सुरक्षा मानकों के पालन में कहीं कोई कमी भी रही।

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