Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी पर भूल से भी न करें ये गलती, दुर्भाग्य से भर जाएगा जीवन

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस बार यह पावन तिथि 14 जनवरी, 2026 को पड़ रही है। इस एकादशी का नाम 'षटतिला' इसलिए है, क्योंकि इस दिन तिल का छह तरीकों से उपयोग (स्नान, उबटन, तर्पण, दान, भोजन और आहुति) किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, षटतिला एकादशी का व्रत (Shattila Ekadashi 2026) करने से व्यक्ति को सोना दान करने के समान पुण्य फल मिलता है और उसके अनजाने में किए गए पाप भी नष्ट हो जाते हैं।

हालांकि, इस दिन कुछ वर्जित कामों को करने से न केवल व्रत का फल निष्फल हो जाता है, बल्कि जीवन में दरिद्रता और दुर्भाग्य का आगमन भी हो सकता है। आइए उन नियमों के बारे में जानते हैं।

षटतिला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये काम

Read More Vastu Tips: घर खरीदने की एक्साइटमेंट में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये बड़ी चूक? जान लें वास्तु के ये नियम

चावल का सेवन
एकादशी के दिन चावल खाना शास्त्रों में वर्जित है। माना जाता है कि इस दिन चावल का सेवन करने वाला व्यक्ति अगले जन्म में रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म लेना पड़ता है। षटतिला एकादशी पर विशेष रूप से अनाज और चावल से दूर रहना चाहिए।

Read More Vastu Dosh Upay: अगर घर में दिखें ये संकेत, तो समझ लें कि है वास्तु दोष, इन उपायों से पाएं छुटकारा

तिल का उपयोग न करना
इस एकादशी पर तिल का दान और पूजा में तिल का उपयोग जरूर करना चाहिए। जो जातक ऐसा नहीं करते उनके व्रत का फल अधूरा माना जाता है।

तुलसी के पत्ते तोड़ना
भगवान विष्णु को तुलसी बेहद प्रिय है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी दल तोड़ना महापाप माना गया है। अगर पूजा के लिए तुलसी के पत्तों की जरूरत है, तो उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

तामसिक भोजन 
षटतिला एकादशी के दिन तामसिक चीजों का सेवन गलती से भी नहीं करना चाहिए। इससे घर की सुख-शांति नष्ट हो जाती है। इस दिन मन और शरीर दोनों पवित्र रखना चाहिए।

विवाद
अक्सर लोग व्रत तो रखते हैं, लेकिन इस दौरान दूसरों की निंदा भी करते हैं। कहा जाता है कि एकादशी पर तामसिक विचार लाने से व्रत का शुभ फल खत्म होता है। विशेषकर इस दिन झूठ बोलने से बचना चाहिए।

दुर्भाग्य दूर करने के लिए क्या करें?
तिल का दान: सामर्थ्य अनुसार तिल और गुड़ का दान करें।
ब्रह्मचर्य का पालन: एकादशी में ब्रह्मचर्य का पालन करें।
विष्णु सहस्रनाम: इस दिन भगवान विष्णु के सहस्रनामों का पाठ करने से कुंडली के अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है।

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

More News

तेज रफ्तार बनी मौत का कारण: बाइक रेसिंग के दौरान नाले में गिरा नाबालिग, मौके पर गई जान

राज्य