छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में मुकदमों का बोझ हुआ कम, इस साल 64 हजार से ज्यादा केस निपटाकर बना रिकॉर्ड

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में मुकदमों का बोझ हुआ कम, इस साल 64 हजार से ज्यादा केस निपटाकर बना रिकॉर्ड

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अब न्याय तेजी से मिल रहा है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की पहल पर इस साल मुकदमों के निपटारे में बड़ी कामयाबी मिली है। हाईकोर्ट ने साल 2025 में 64 हजार से ज्यादा केस निपटाए हैं। खास बात यह है कि जितने नए मामले दर्ज हुए उससे कहीं ज्यादा पुराने मुकदमों का फैसला सुनाया गया। कोर्ट के इस कदम से उन हजारों लोगों को राहत मिली है जो सालों से न्याय का इंतजार कर रहे थे।

 

पेंडिंग मामलों को निपटाने पर रहा जोर

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हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल की शुरुआत में मुकदमों का काफी बोझ था। लेकिन चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने साफ निर्देश दिए थे कि न्याय में देरी नहीं होनी चाहिए। उनके नेतृत्व में जजों और स्टाफ ने मिलकर काम किया जिसका असर अब आंकड़ों में दिख रहा है। कोर्ट ने न केवल नए मामलों को सुना बल्कि उन फाइलों को भी बंद किया जो लंबे समय से धूल फांक रही थीं।

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आंकड़ों में समझिए राहत की तस्वीर

इस साल हाईकोर्ट की कार्यक्षमता 115 प्रतिशत से भी ज्यादा रही। इसका सीधा मतलब है कि कोर्ट में जितने नए केस आए उससे 15 फीसदी ज्यादा पुराने केस खत्म किए गए। साल की शुरुआत में जहां 84 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग थे अब उनकी संख्या में 8 हजार से ज्यादा की कमी आई है। यह पिछले कई सालों के मुकाबले एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

आम जनता को मिला फायदा

अदालती कार्यवाही में हुए इस सुधार का सबसे बड़ा फायदा आम जनता को हुआ है। दूर-दराज के गांवों से आने वाले फरियादी जो सालों तक तारीखों के चक्कर में फंसे रहते थे अब उन्हें जल्दी फैसले मिल रहे हैं। कोर्ट सूत्रों का कहना है कि मुख्य न्यायाधीश खुद समय-समय पर केसों की पेंडेंसी की निगरानी करते हैं ताकि कामकाज में सुस्ती न आए।

हाईकोर्ट रिपोर्ट कार्ड 2025

  • जनवरी में लंबित केस 84,305 
  • साल भर में आए नए केस 55,416 
  • साल भर में निपटाए गए केस 64,054 
  • कुल कमी 8,638 केस 

प्राप्त जानकारी के अनुसार मुकदमों की संख्या में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई है। कोर्ट का लक्ष्य है कि आने वाले समय में तकनीक और बेहतर तालमेल के जरिए पेंडिंग केसों की संख्या को और भी कम किया जाए ताकि हर छत्तीसगढ़िया को समय पर सस्ता और सुलभ न्याय मिल सके।

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