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बिलासपुर में 25 साल से दोहरी मार: मूलभूत सुविधाओं के बिना दो प्रकार के टैक्स वसूल रहा निगम
बिलासपुर। बिलासपुर के राजकिशोर नगर, व्यापार विहार और ट्रांसपोर्ट नगर सहित कई क्षेत्रों के लगभग 5713 रहवासी पिछले ढाई दशक से दोहरे आर्थिक बोझ का सामना कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में नगर निगम द्वारा एक ही भूखंड पर संपत्ति कर के साथ साथ भू भाटक यानी लीज रेंट की वसूली की जा रही है। विडंबना यह है कि भारी भरकम टैक्स देने के बावजूद इन इलाकों में सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं अब भी अधूरी हैं। रहवासियों का आरोप है कि एक ही जमीन पर दो तरह के कर वसूलना मध्यमवर्गीय परिवारों के साथ अन्याय है।
राहत के बजाय शुल्क में 300 प्रतिशत की वृद्धि
लंबे समय से इस दोहरी कर प्रणाली को समाप्त करने की मांग की जा रही है, लेकिन राहत देने के स्थान पर नगर निगम की एमआईसी ने नवीनीकरण शुल्क में भारी बढ़ोतरी कर दी है। नवीनीकरण न कराने पर लगने वाले 1 हजार रुपए के जुर्माने को अब बढ़ाकर 3 हजार रुपए करने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार इन 5,713 मकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से सालाना करोड़ों रुपए का अतिरिक्त राजस्व वसूला जा रहा है। 1500 वर्ग फीट के आवासीय भूखंड पर लगभग 700 रुपए और 5600 वर्ग फीट की व्यावसायिक दुकान पर 12 हजार रुपए तक का भू भाटक लिया जा रहा है। इस मद से निगम के खजाने में सालाना करीब 2.60 करोड़ रुपए जमा हो रहे हैं।
इन प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ रहा दोहरे टैक्स का असर
बिलासपुर विकास प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं के तहत विकसित इन कॉलोनियों में संपत्तियों की संख्या इस प्रकार है:
- व्यापार विहार: 1678
- राजकिशोर नगर: 1413
- यदुनंदन नगर: 1324
- ट्रांसपोर्ट नगर: 592
- नर्मदा नगर: 448
- गोकुल नगर (व्यावसायिक): 116
- पत्रकार कॉलोनी: 48
- नूतन इन्क्लेव: 44
- * माधव कॉम्प्लेक्स: 23
- मगध नगर: 16
वर्ष 2001 से उलझा है मामला
इन क्षेत्रों के निवासियों का कहना है कि वर्ष 2001 में जब इन कॉलोनियों को निगम सीमा में शामिल किया गया, तब से संपत्ति कर की वसूली शुरू हुई। जमीन फ्री होल्ड न होने के कारण निगम प्रशासन लीज रेंट भी वसूल रहा है। नागरिकों का तर्क है कि जब वे निगम की सभी शहरी सुविधाओं के लिए टैक्स दे रहे हैं, तो अलग से लीज रेंट का कोई वैधानिक औचित्य नहीं रह जाता।
नेताओं से केवल आश्वासन, धरातल पर सुविधाएं नदारद
राजकिशोर नगर निवासी दिपेन्द्र मसीह का कहना है कि वे पिछले 25 वर्षों से इस दोहरे कर को माफ करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन नेताओं से केवल आश्वासन ही प्राप्त हुआ है। ट्रांसपोर्ट नगर के दिनेश मिश्रा ने कहा कि एक ही संपत्ति पर दो बार कर लेना पूरी तरह अनुचित है और इसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों ने शिकायत की है कि टैक्स देने के बाद भी जल निकासी और बेहतर सड़कों जैसी मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
मामले को लेकर नगर निगम की महापौर पूजा विधानी का कहना है कि राजकिशोर नगर और व्यापार विहार सहित अन्य स्थानों पर भू भाटक और टैक्स के संबंध में शिकायतें प्राप्त हुई हैं। कुछ नागरिक इस दोहरी व्यवस्था को समाप्त करने की मांग को लेकर मिले हैं। इस विषय को एमआईसी की बैठक में रखा जाएगा और चर्चा के बाद ही आगेकी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
