कर्ज में डूबा पाकिस्तान बना चीन का हथियार एजेंट, 9 देशों को फाइटर जेट बेचकर अरबों की डील
नई दिल्ली। आर्थिक बदहाली से जूझ रहा पाकिस्तान अब अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए हथियारों की दलाली के रास्ते पर उतर आया है। विदेशी कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान चीन के लड़ाकू विमानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर खुद को आर्थिक राहत दिलाने की कोशिश कर रहा है। ताज़ा जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान 9 देशों को चीन के JF-17 फाइटर जेट बेच रहा है, जिनमें सऊदी अरब समेत 8 मुस्लिम देश शामिल बताए जा रहे हैं।
पाकिस्तान ने चीन के JF-17 लड़ाकू विमान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बोली प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इस पूरे मॉडल को एक जॉइंट वेंचर के रूप में खड़ा किया गया है, जिसका संचालन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से किया जा रहा है। इसी ढांचे के तहत जे-सीरीज़ के लड़ाकू विमानों का संयुक्त उत्पादन और निर्यात किया जा रहा है।
इस्लामाबाद के कामरा में चीन की चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन और पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्पलेक्स के बीच इस जॉइंट वेंचर की नींव रखी गई है। इस प्रोजेक्ट में चीन के करीब 500 एयरोनॉटिकल इंजीनियर तैनात हैं, जिससे यह साफ हो जाता है कि तकनीक और नियंत्रण पूरी तरह चीन के हाथ में है, जबकि पाकिस्तान केवल साझेदार और बिचौलिया की भूमिका निभा रहा है।
चीन-पाकिस्तान के इस हथियार गठजोड़ को ‘ऑलवेज ब्रदर डील’ का नाम दिया गया है। इस डील के तहत 200 लड़ाकू विमानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने का लक्ष्य रखा गया है। समझौते के मुताबिक इस सौदे से होने वाली कमाई का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा चीन के खाते में जाएगा, जबकि पाकिस्तान को केवल 20 प्रतिशत हिस्सेदारी मिलेगी।
पाकिस्तान अब तक सऊदी अरब, नाइजीरिया, अज़रबैजान, लीबिया, मोरक्को, इंडोनेशिया, इथियोपिया और सूडान जैसे देशों से संपर्क कर चुका है और कई जगह सौदे अंतिम चरण में बताए जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान मुस्लिम देशों के साथ अपने राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों का फायदा उठाकर इन सौदों को आगे बढ़ा रहा है।
इन लड़ाकू विमान सौदों के पीछे पाकिस्तान की सबसे बड़ी मजबूरी उसका भारी कर्ज है। पाकिस्तान ने अकेले सऊदी अरब से लगभग 70 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले रखा है। सूत्रों के मुताबिक फाइटर जेट सौदों के जरिए पाकिस्तान अब तक करीब 18 हजार करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने में सफल रहा है, जिससे उसे अस्थायी आर्थिक राहत मिली है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की यह रणनीति उसे तत्काल राहत तो दे सकती है, लेकिन लंबे समय में यह उसे हथियार-निर्भर अर्थव्यवस्था की ओर धकेल रही है। बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान कर्ज से उबरने के लिए इसी तरह हथियारों की दलाली पर निर्भर रहेगा, और क्या चीन इस मॉडल के जरिए वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी पकड़ और मजबूत करता चला जाएगा।
