बच्चों को 2 साल तक कम दें चीनी? स्टडी में सामने आया चौंकाने वाला कनेक्शन, जानें एक्सपर्ट की राय
Sugar Intake in Children: नवजात बच्चे के खान-पान को लेकर माता-पिता के मन में कई सवाल होते हैं। इनमें एक बड़ा सवाल यह भी रहता है कि बच्चे को मीठी चीजें कब से दी जानी चाहिए। हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन ने जीवन के शुरुआती वर्षों में चीनी के सेवन और आगे चलकर स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव के बीच संभावित संबंध की ओर ध्यान खींचा है। अध्ययन में शुरुआती जीवन में कम चीनी मिलने और बाद के वर्षों में कुछ मेटाबॉलिक बीमारियों के कम जोखिम के बीच संबंध पाया गया। हालांकि, इसे सीधे तौर पर यह साबित करने वाला निष्कर्ष नहीं माना जा सकता कि दो साल तक चीनी न देने से कैंसर निश्चित रूप से नहीं होगा। बच्चे के शुरुआती आहार में चीनी की मात्रा को सीमित रखना फिर भी विशेषज्ञों की सामान्य सलाह के अनुरूप है।
क्या कहती है स्टडी?
रिसर्चर्स ने जीवन के शुरुआती करीब 1000 दिनों में चीनी की उपलब्धता और लंबे समय में स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझने की कोशिश की। इसके लिए ब्रिटेन में चीनी राशनिंग के दौर को एक प्राकृतिक प्रयोग की तरह देखा गया। सितंबर 1953 में ब्रिटेन में चीनी की राशनिंग लागू थी, जिससे लोगों की चीनी की खपत सीमित रही। बाद में जब राशनिंग समाप्त हुई तो चीनी का सेवन तेजी से बढ़ गया। शोधकर्ताओं ने इस बदलाव के आसपास जन्मे करीब 64 हजार वयस्कों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों की तुलना की। अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों को जीवन के शुरुआती दौर में अपेक्षाकृत कम चीनी मिली थी, उनमें आगे चलकर कुछ मेटाबॉलिक बीमारियों का जोखिम कम दिखाई दिया। हालांकि, ऐसे ऐतिहासिक डेटा से कारण और प्रभाव को पूरी तरह साबित करना मुश्किल होता है।
क्या चीनी कम करने से कैंसर का खतरा भी घटता है?
इस रिसर्च को कैंसर से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन यहां सावधानी जरूरी है। किसी व्यक्ति में कैंसर का जोखिम केवल चीनी के सेवन से तय नहीं होता। उम्र, जेनेटिक्स, वजन, शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान, शराब, पर्यावरण और कई अन्य कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि दो साल तक बच्चे को चीनी न देने से भविष्य में कैंसर से बचाव की गारंटी मिल जाती है। रिसर्च के निष्कर्षों को शुरुआती जीवन में बेहतर खान-पान की अहमियत के संदर्भ में समझना ज्यादा उचित है।
बच्चों के लिए ज्यादा चीनी क्यों चिंता का विषय है?
विशेषज्ञों के अनुसार, बचपन से ही बहुत ज्यादा मीठा खाने या मीठे पेय लेने की आदत आगे चलकर अधिक कैलोरी सेवन, वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ सकती है। लंबे समय में इससे टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। खासकर शुगर वाले ड्रिंक, पैकेज्ड स्नैक्स, मिठाइयां और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थ बच्चों की नियमित डाइट का हिस्सा नहीं बनने चाहिए।
क्या बच्चों को बिल्कुल मीठा नहीं देना चाहिए?
बच्चे को जीवनभर मिठाई, चॉकलेट या अन्य मीठी चीजों से पूरी तरह दूर रखना जरूरी नहीं है। ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि मीठे की मात्रा और आवृत्ति नियंत्रित रहे। रोजाना मीठे पेय या ज्यादा चीनी वाले पैकेज्ड फूड देना और कभी-कभार सीमित मात्रा में मिठाई देना एक जैसी बात नहीं है। बच्चे की उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार डाइट तय करना बेहतर रहता है।
बच्चों की डाइट में क्या शामिल करें?
माता-पिता बच्चों को उम्र के अनुसार पौष्टिक और विविध आहार देने पर ध्यान दें। डाइट में फल, सब्जियां, दालें, दूध या उपयुक्त डेयरी विकल्प, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन जैसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। साथ ही बच्चों को कम उम्र से ही सक्रिय रहने और नियमित शारीरिक गतिविधि की आदत डालना भी जरूरी है।
सबसे जरूरी बात
बचपन में ज्यादा चीनी की आदत से बचना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन किसी एक स्टडी के आधार पर यह दावा करना उचित नहीं है कि दो साल तक चीनी न खाने से कैंसर या अन्य बीमारियों से निश्चित सुरक्षा मिलती है। खासकर नवजात और शिशुओं के खान-पान में कोई बदलाव करने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य पोषण विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध रिसर्च और सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। यह किसी बीमारी की रोकथाम या इलाज की गारंटी नहीं देता। शिशु और बच्चे की डाइट उसकी उम्र, विकास और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह से तय करें।
