खाता किसी का, खेल किसी और का! साइबर ठगी की रकम खपाने वाला म्यूल अकाउंट नेटवर्क बेनकाब, 2 गिरफ्तार
बलौदाबाजार। साइबर ठगी के पैसों को बैंक खातों के जरिए इधर-उधर पहुंचाने वाले नेटवर्क पर बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस ने कार्रवाई की है। पलारी पुलिस ने ऑनलाइन फ्रॉड की रकम अपने खातों में मंगाकर आगे ट्रांसफर करने के आरोप में दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि बैंक खाते कमीशन के लालच में उपलब्ध कराए गए थे और उनका इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी तथा अन्य संदिग्ध ऑनलाइन लेनदेन के लिए किया जा रहा था।
जयपुर के युवक से हुई थी 1.08 लाख की ठगी
मामले की शुरुआत राजस्थान के जयपुर निवासी कैलाशचंद सेन की साइबर पोर्टल पर दर्ज शिकायत से हुई। शिकायत के मुताबिक, साइबर ठगों ने उन्हें झांसे में लेकर 1,08,644 रुपये की ऑनलाइन ठगी की थी। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम पलारी स्थित UCO बैंक के एक खाते में पहुंची थी। बैंक खाते का स्टेटमेंट और लेनदेन की जानकारी खंगालने पर यह रकम खिलेंद्र वर्मा के खाते में आने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की।
कमीशन के लालच में खुलवाया बैंक खाता
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में खिलेंद्र ने बताया कि रायपुर निवासी दीपेश मल्होत्रा ने उसे बैंक खाता खुलवाने के लिए तैयार किया था। कथित तौर पर खाते का इस्तेमाल करने के बदले उसे कमीशन देने का लालच दिया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि बैंक खाते के साथ ATM कार्ड और सिम कार्ड भी दूसरे आरोपी के पास थे। यानी खाता धारक के नाम पर होने के बावजूद उसके संचालन और लेनदेन पर किसी और का नियंत्रण था। इसी तरह के खातों को साइबर अपराध की भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अवैध रकम को एक खाते से दूसरे खाते तक पहुंचाने के लिए किया जाता है।
ऑनलाइन गेमिंग और संदिग्ध लेनदेन से जुड़े तार
पुलिस की जांच में सामने आया कि संबंधित बैंक खातों में ऑनलाइन गेमिंग समेत अन्य संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी रकम का लेनदेन किया जा रहा था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पैन कार्ड की कॉपी और अन्य दस्तावेज भी जब्त किए हैं। अब इन दस्तावेजों और बैंक ट्रांजेक्शन के आधार पर नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है।
4 सितंबर को गिरफ्तारी, आगे की जांच जारी
पुलिस ने दोनों आरोपियों को 4 सितंबर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की गई। मामले में एक अन्य आरोपी के फरार होने की जानकारी सामने आई है, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के जरिए कितनी रकम का लेनदेन हुआ, पैसा किन-किन खातों तक पहुंचा और साइबर ठगी के इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं ?
