कम नींद से कमजोर हो सकती है इम्यूनिटी! जानें नींद पूरी न होने पर शरीर पर क्या पड़ता है असर
आज की व्यस्त लाइफस्टाइल में देर रात तक मोबाइल चलाना, काम का तनाव, पढ़ाई और अनियमित दिनचर्या के कारण नींद पूरी न होना आम समस्या बन गई है। कई लोग रोजाना पर्याप्त घंटे सोने के बजाय देर रात तक जागते हैं और सुबह जल्दी उठ जाते हैं। कभी-कभार ऐसा होना बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहे तो शरीर और दिमाग दोनों पर इसका असर पड़ सकता है। पर्याप्त नींद सिर्फ थकान दूर करने के लिए जरूरी नहीं है। नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट (NHLBI) के अनुसार, नींद और शरीर के इम्यून सिस्टम के बीच महत्वपूर्ण संबंध है। लगातार नींद की कमी होने पर शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। आइए समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है।
नींद पूरी न होने से इम्यून सिस्टम कैसे प्रभावित होता है?
सोते समय शरीर आराम करने के साथ-साथ कई जरूरी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करता है। इम्यून सिस्टम भी इसी दौरान संक्रमण से लड़ने वाली अपनी गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित करता है। जब किसी व्यक्ति को लगातार पर्याप्त नींद नहीं मिलती, तो इम्यून सिस्टम की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। इससे शरीर में संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम होने और कुछ संक्रमणों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ने की संभावना रहती है। यानी नींद की कमी को केवल दिनभर की सुस्ती या थकान से जोड़कर देखना सही नहीं है। लंबे समय तक खराब नींद शरीर की ओवरऑल हेल्थ पर असर डाल सकती है।
कम नींद से और कौन-सी परेशानियां बढ़ सकती हैं?
लगातार कम सोने का असर शरीर के कई हिस्सों पर पड़ सकता है। नींद पूरी न होने पर दिन में ध्यान लगाने, चीजों को याद रखने और सही तरीके से निर्णय लेने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा लंबे समय तक खराब नींद का संबंध वजन बढ़ने, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्याओं के बढ़े हुए जोखिम से भी पाया गया है। नींद की कमी भूख और पेट भरा होने का संकेत देने वाले हार्मोन के संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है, जिसके कारण कुछ लोगों में ज्यादा खाने की इच्छा बढ़ सकती है।
कितने घंटे की नींद जरूरी है?
नींद की जरूरत उम्र और व्यक्ति की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग होती है। सामान्य तौर पर अधिकांश वयस्कों के लिए रोज करीब 7 से 9 घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है। सिर्फ घंटों की संख्या ही महत्वपूर्ण नहीं है। लगातार बिना ज्यादा रुकावट के अच्छी क्वालिटी की नींद लेना भी जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति पर्याप्त समय बिस्तर पर रहने के बावजूद तरोताजा महसूस नहीं करता, तो इसकी वजह पर ध्यान देना चाहिए।
अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आसान आदतें
नींद की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव मददगार हो सकता है
- रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें।
- सोने से पहले मोबाइल और दूसरे स्क्रीन डिवाइस का इस्तेमाल कम करें।
- शाम के बाद ज्यादा चाय, कॉफी या दूसरे कैफीन वाले पेय लेने से बचें।
- सोने का कमरा शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें।
- दिन में नियमित रूप से हल्की या मध्यम शारीरिक गतिविधि करें।
- सोने से ठीक पहले बहुत ज्यादा या भारी खाना न खाएं।
- दिन में बहुत लंबी झपकी लेने से बचें।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
अगर कई हफ्तों से लगातार नींद आने में परेशानी हो रही है, रात में बार-बार आंख खुलती है या पर्याप्त समय सोने के बाद भी दिनभर अत्यधिक थकान और नींद महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नियमित और पर्याप्त नींद शरीर की रिकवरी, दिमाग की कार्यक्षमता और इम्यून सिस्टम की सामान्य कार्यप्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए व्यस्त दिनचर्या के बीच नींद को कम करने के बजाय इसे अपनी सेहत का जरूरी हिस्सा मानना बेहतर है।
