थानों में सड़ रहे जब्त वाहन तो तुरंत लौटाएं मालिक को, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश; कहा- खड़े-खड़े कबाड़ बनाना किसी के काम का नहीं

थानों में सड़ रहे जब्त वाहन तो तुरंत लौटाएं मालिक को, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश; कहा- खड़े-खड़े कबाड़ बनाना किसी के काम का नहीं

नई दिल्ली। देशभर के पुलिस थानों में लंबे समय से खड़े जब्त वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जब्त गाड़ियों को वर्षों तक थाने में खड़ा रखकर उन्हें कबाड़ में तब्दील होने देना किसी भी लिहाज से उचित नहीं है। यदि वाहन मालिक अंतरिम कस्टडी के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाता है, तो उसकी अर्जी पर बिना अनावश्यक देरी के उचित शर्तों के साथ फैसला किया जाना चाहिए।

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और जस्टिस चंद्रशेखर की पीठ ने यह टिप्पणी अवैध शराब कारोबार से जुड़े एक मामले में जब्त ट्रक को अंतरिम कस्टडी में सौंपने का आदेश देते हुए की। अदालत ने कहा कि थानों के बाहर महीनों और वर्षों तक वाहन खड़े रहने से न सिर्फ जगह घिरती है, बल्कि रखरखाव के अभाव में उनकी हालत भी लगातार खराब होती जाती है।

‘थाने में खड़ा वाहन किसी के काम नहीं आता’
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि जब्त वाहन को सिर्फ इस वजह से थाने में खड़ा रखना जरूरी नहीं है कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान उसकी जरूरत पड़ सकती है। अदालत ने कहा कि ट्रायल के दौरान यदि वाहन से संबंधित जानकारी या उसकी स्थिति की जरूरत पड़े तो उसे दूसरे तरीकों से प्रमाणित किया जा सकता है।

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पीठ ने निर्देश दिया कि वाहन को सौंपने से पहले उसके फोटो और वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएं, ताकि मुकदमे के दौरान वाहन की पहचान और स्थिति से जुड़े साक्ष्य उपलब्ध रहें। इस तरह सबूत भी सुरक्षित रहेंगे और वाहन को लंबे समय तक थाने में सड़ने से भी बचाया जा सकेगा।

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अंतरिम कस्टडी की अर्जी पर तेजी से हो फैसला
अदालत ने कहा कि वाहन मालिक की ओर से अंतरिम कस्टडी की अर्जी दाखिल होने के बाद अदालतों को मामले में तेजी दिखानी चाहिए। आवश्यक शर्तें तय करके वाहन को उसके मालिक या संबंधित व्यक्ति की सुपुर्दगी में दिया जा सकता है। कोर्ट का जोर इस बात पर रहा कि जब्त संपत्ति को बेवजह निष्क्रिय अवस्था में पड़े रहने देना समाधान नहीं है। खासकर वाहन जैसी संपत्ति समय के साथ खराब होती है और उसकी कीमत भी घटती जाती है।

सबूत बचाएं, गाड़ियों को कबाड़ बनने से रोकें
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख का सीधा संदेश है कि आपराधिक मामलों में जब्त वाहनों को सबूत के नाम पर अनिश्चितकाल तक थानों में खड़ा रखना उचित प्रक्रिया नहीं हो सकती। जरूरी साक्ष्य फोटो, वीडियो और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के बाद वाहन की अंतरिम कस्टडी पर समय रहते फैसला किया जाना चाहिए। इस आदेश से उन वाहन मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी गाड़ियां लंबे समय से पुलिस थानों या अन्य परिसरों में जब्ती की कार्रवाई के बाद खड़ी हैं।

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