सुप्रीम कोर्ट की छत्तीसगढ़ पुलिस को फटकार: कोरबा एसपी को किया तलब, दुष्कर्म के आरोपी को पेश नहीं करने पर कहा- 'यह आदेश का जानबूझकर उल्लंघन है
नई दिल्ली/रायपुर (NJG News):
छत्तीसगढ़ पुलिस की लचर कार्यप्रणाली और अदालती आदेशों की अनदेखी को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने घोर लापरवाही के एक मामले में सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए कोरबा जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को सीधे तलब कर लिया है। एक दुष्कर्म के संवेदनशील मामले की अहम सुनवाई के दौरान जब पुलिस आरोपी को शीर्ष अदालत में पेश करने में नाकाम रही, तो जजों का गुस्सा फूट पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने इसे सामान्य चूक न मानते हुए 'आदेश का जानबूझकर किया गया उल्लंघन' (Willful Defiance) करार दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने कोरबा एसपी को कारण बताओ नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का फरमान सुनाया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला कोरबा जिले से जुड़े एक दुष्कर्म के केस का है, जिसमें चंद्र कुमार जायसवाल उर्फ 'बुट्टू' मुख्य आरोपी है। निचली अदालतों से होते हुए यह मामला जब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (बिलासपुर) पहुंचा, तो उच्च न्यायालय ने आरोपी चंद्र कुमार जायसवाल को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया था। हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, जिसमें अदालत ने आरोपी की उपस्थिति अनिवार्य की थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की हुई अवहेलना
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की युगल पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। पिछली सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पुलिस महकमे को स्पष्ट हिदायत दी थी कि अगली पेशी में आरोपी को अदालत के समक्ष हर हाल में पेश किया जाए। इसके बावजूद, जब मामला दोबारा सुनवाई के लिए पीठ के सामने आया, तो आरोपी अदालत से नदारद था। पुलिस उसे लाने में पूरी तरह विफल रही। अदालत के इतने कड़े और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पुलिस के इस ढुलमुल रवैये ने सुप्रीम कोर्ट को नाराज कर दिया।
24 अप्रैल को कोर्ट में पेश होंगे कोरबा एसपी
पीठ ने पुलिस की इस कार्यशैली पर कड़ी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद प्रतिवादी (आरोपी) की अनुपस्थिति किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। इसे सीधे तौर पर अदालत की अवमानना मानते हुए कोर्ट ने कोरबा एसपी को 24 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। अब एसपी को शीर्ष अदालत के सामने खड़े होकर यह जवाब देना होगा कि आखिर आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
आरोपी को पेश करने का पूरा खर्च उठाएगी राज्य सरकार
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस महकमे को कड़ा संदेश देते हुए यह भी आदेश दिया है कि आगामी सुनवाई पर आरोपी को हर हाल में दिल्ली में कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस की लापरवाही के कारण अब प्रतिवादी को अदालत में लाने और पेश करने का जो भी पूरा खर्च आएगा, वह छत्तीसगढ़ राज्य सरकार को ही वहन करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रवैये के बाद पुलिस मुख्यालय (PHQ) से लेकर कोरबा पुलिस महकमे तक में हड़कंप मच गया है। यह आदेश ब्यूरोक्रेसी और पुलिस प्रशासन के लिए एक कड़ा सबक है कि देश की सबसे बड़ी अदालत के निर्देशों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। फिलहाल, 24 अप्रैल की पेशी को लेकर जवाब तैयार किए जा रहे हैं।
