सक्ती में बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं 49 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं डिलीवरी के लिए जिला छोड़ने को मजबूर

सक्ती में बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं 49 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं डिलीवरी के लिए जिला छोड़ने को मजबूर

जांजगीर। सक्ती जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की बेहद कड़वी और डरावनी हकीकत सामने आई है। यह हकीकत जिले में मातृत्व सुरक्षा के बड़े दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सुशासन तिहार 2026 की ताजा समीक्षा रिपोर्ट के आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग के खोखले दावों की पूरी तरह पोल खोल दी है। जिले में मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं की हालत इतनी ज्यादा बदहाल है कि यहां की लगभग आधी गर्भवती महिलाओं को प्रसव जैसे नाजुक और संवेदनशील समय में अपना जिला छोड़कर बाहर जाना पड़ता है।

मजबूरी में यह मरीज बिलासपुर या रायगढ़ के बड़े अस्पतालों का रुख करती हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी और अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव इस बड़े संकट की सबसे मुख्य वजह है। ताजा समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने वाली तमाम सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित होकर रह गई हैं।

आंकड़ों की बात करें तो जिले की कुल गर्भवती महिलाओं में से 4767 यानी 49.24 प्रतिशत महिलाओं को प्रसव के लिए जिले से बाहर के स्वास्थ्य संस्थानों में जाना पड़ा है। जिले में कुल 4913 प्रसव हुए हैं। इनमें से सरकारी अस्पतालों में प्रसव का प्रतिशत कुल पंजीयन के मुकाबले मात्र 32 प्रतिशत ही दर्ज किया गया है। रात के समय या किसी भी आपातकालीन स्थिति में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध न होने के कारण 22.10 प्रतिशत मरीज निजी अस्पतालों की शरण लेने को मजबूर हुई हैं।

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रात के समय सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का न मिलना ग्रामीण इलाकों की गरीब महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। जानकारों का मानना है कि जब तक सक्ती के फर्स्ट रेफरल यूनिट को पूरी तरह से सक्रिय कर वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती नहीं की जाती तब तक सड़कों पर एंबुलेंस में प्रसव होने का खतरा लगातार बना रहेगा। साथ ही रेफरल के दौरान होने वाली मौतों का आंकड़ा भी कम नहीं होगा। वर्तमान में जिले का फर्स्ट रेफरल यूनिट सही ढंग से संचालित नहीं हो पा रहा है। यहां सी सेक्शन और जटिल मामलों का इलाज करने के बजाय मरीजों को सीधे बाहर के लिए रेफर कर दिया जाता है।

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अस्पतालों में बुनियादी ढांचे की बात करें तो ऑपरेशन थिएटर ब्लड स्टोरेज यूनिट और जीवन रक्षक उपकरण या तो अभी तक अधूरे हैं या फिर काम नहीं कर रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली पानी और ऑक्सीजन सप्लाई जैसी सबसे जरूरी सुविधाओं की भी भारी कमी देखी गई है।

रिपोर्ट का सबसे डरावना पहलू डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की भारी कमी है। जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की जान बचाने वाली विशेषज्ञ टीम कहीं भी नजर नहीं आती है। जिले में स्त्री रोग विशेषज्ञ बेहोश करने वाले डॉक्टर और बाल रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता न के बराबर है। चौबीसों घंटे अस्पताल चलाने के लिए जरूरी ट्रेंड स्टाफ नर्स लैब टेक्नीशियन और पैरामेडिकल स्टाफ के कई पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। जटिल प्रसव और इमरजेंसी केस को संभालने के लिए जिस मल्टी डिसिप्लिनरी विशेषज्ञ टीम की जरूरत होती है उसकी सक्ती जिले में भारी कमी है।

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