कबीरधाम का घोस्ट धान घोटाला: कागजों पर बंपर खरीदी, गोदामों में सन्नाटा! 3 केंद्रों में 1 करोड़ का खेल, क्या बाकी 105 समितियों में भी चल रही थी रीसायकल की फैक्ट्री?

कबीरधाम का घोस्ट धान घोटाला: कागजों पर बंपर खरीदी, गोदामों में सन्नाटा! 3 केंद्रों में 1 करोड़ का खेल, क्या बाकी 105 समितियों में भी चल रही थी रीसायकल की फैक्ट्री?

NJV डेस्क। छत्तीसगढ़ में सत्ताएं और सरकारें भले ही बदल जाएं, लेकिन धान खरीदी में सेंधमारी करने वाले 'सिस्टम के सफेदपोशों' का खेल कभी नहीं रुकता। कबीरधाम (कवर्धा) जिले में एक बार फिर धान खरीदी का एक ऐसा 'सुनियोजित आर्थिक अपराध' सामने आया है, जिसने पूरी पारदर्शी ऑनलाइन व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। जिले के महज तीन उपार्जन केंद्रों (बघर्रा, बाघामुड़ा और रमतला) में फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान 4471.98 क्विंटल धान गायब मिला है। बाजार मूल्य के हिसाब से यह घोटाला 1 करोड़ 5 लाख रुपये से अधिक का है।

लेकिन यह खबर सिर्फ तीन केंद्रों से धान गायब होने की नहीं है। इसके पीछे का एंगल उस 'नेक्सस' (Nexus) का है, जो यह बताता है कि कैसे पोर्टल पर किसानों के नाम से फर्जी एंट्री होती है, सरकार के खजाने से करोड़ों का भुगतान हो जाता है, और गोदामों में एक दाना धान नहीं पहुंचता।

 

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पोर्टल फुल, गोदाम गुल: ऐसे रची गई डिजिटल डकैती

 

पहले धान घोटालों में बोरियां गायब होती थीं, लेकिन इस बार का खेल 'डिजिटल' था। जांच रिपोर्ट चीख-चीख कर कह रही है कि यह कोई मानवीय भूल या चूहे द्वारा धान खाने का मामला नहीं है। प्रभारियों और समिति प्रबंधकों ने ऑनलाइन पोर्टल पर धान की पूरी एंट्री कर दी। कागजों पर खरीदी सफल रही और इसका बकायदा पेमेंट भी हो गया। लेकिन जब मौके पर जाकर फिजिकल स्टॉक गिना गया, तो वहां सन्नाटा पसरा था। यह सीधा संकेत है कि धान कभी खरीदा ही नहीं गया, केवल कागजों पर किसानों का नाम इस्तेमाल कर सरकारी पैसा डकार लिया गया।

 

घोटाले का ट्रायंगल: तीन समितियां और 1 करोड़ का गबन

 

 बाघामुड़ा (सिंडिकेट का एपीसेंटर) इस केंद्र में भ्रष्टाचार ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। यहां से 1929.20 क्विंटल धान गायब है। करीब 45.70 लाख रुपये की इस हेराफेरी में सिस्टम के साथ इस कदर खिलवाड़ किया गया कि ऑडिट के डर को भी दरकिनार कर दिया गया।

 

रमतला (पुराने धान की नई पैकिंग) यहां 1291.60 क्विंटल धान कम मिला, जिसकी कीमत 30.60 लाख रुपये है। सूत्रों की मानें तो यहां पुराने स्टॉक को नया बताकर खपाने और नए स्टॉक को 'खुर्द-बुर्द' करने की शातिर रणनीति अपनाई जा रही थी।

 

बघर्रा (कागजों के किसान) 1251.18 क्विंटल धान कागजों पर खरीद लिया गया। 29.64 लाख का पेमेंट भी उठ गया, लेकिन जमीन पर धान का एक बोरा नहीं मिला।

 

राइस मिलर्स और अफसरों की 'मिलीभगत' की सुगबुगाहट

 

क्या कोई समिति प्रभारी अकेले 1 करोड़ रुपये का धान गायब कर सकता है? जवाब है- बिल्कुल नहीं। इस पूरे खेल में 'धान रीसायकल' का एंगल सबसे मजबूत है। आशंका जताई जा रही है कि राइस मिलर्स और खाद्य विभाग के कुछ निचले स्तर के अधिकारियों की साठगांठ से यह खेल हुआ। धान को मिलर्स को बेचा गया और उसी धान को दोबारा सरकारी कांटे पर तौलकर नया भुगतान ले लिया गया।

 

बड़ा सवाल: क्या यह सिर्फ 'ट्रेलर' है?

 

कबीरधाम जिले में कुल 108 उपार्जन केंद्र हैं। अभी महज तीन केंद्रों की जांच में सवा करोड़ का गबन सामने आया है। युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी की यह मांग बिल्कुल जायज नजर आती है कि बाकी 105 केंद्रों की भी निष्पक्ष जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक होनी चाहिए। अगर 3 केंद्रों में 4472 क्विंटल का झोल है, तो क्या बाकी जिले में सब कुछ पाक-साफ है?

 

जिला खाद्य अधिकारी चंद्रशेखर देवांगन ने जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है। दोषी प्रभारियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने, राशि की रिकवरी करने और समितियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लेकिन असली परीक्षा अब प्रशासन की है। क्या कार्रवाई सिर्फ मोहरों (समिति प्रभारियों) तक सीमित रहेगी, या उन 'आकाओं' और 'राइस मिलर्स' के गिरेबान तक भी हाथ पहुंचेंगे, जिनके इशारे के बिना यह करोड़ों का 'घोस्ट धान' घोटाला मुमकिन ही नहीं था?

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